गाजियाबाद: नेहरूनगर स्थित प्रसिद्ध यशोदा अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के बाद मंगलवार को परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने डॉक्टरों पर...
गाजियाबाद: नेहरूनगर स्थित प्रसिद्ध यशोदा अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के बाद मंगलवार को परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर के भीतर ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
अस्पताल परिसर में हंगामे और नारेबाजी की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया।
🚨 प्रसव के तुरंत बाद हुई नवजात की मौत: परिजनों ने अस्पताल परिसर में बैठकर दिया धरना
घटनाक्रम के अनुसार शास्त्री नगर के एफ ब्लॉक निवासी आदित्य जैन ने सोमवार को अपनी गर्भवती पत्नी नलिनी जैन को डिलीवरी (प्रसव) के लिए यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया था:
परिजनों का आरोप: परिजनों के अनुसार, इलाज के दौरान नलिनी ने एक नवजात को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद बच्चे की मौत हो गई।
कार्रवाई की मांग: नवजात की मौत की खबर मिलते ही परिजनों ने अस्पताल में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका सीधा आरोप है कि डॉक्टरों की घोर लापरवाही की वजह से बच्चे की जान गई है। उन्होंने मंगलवार को अस्पताल में धरना देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
🥊 हाथापाई और मारपीट का आरोप: पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
हंगामे के दौरान अस्पताल के माहौल में तनाव काफी बढ़ गया:
स्टाफ का दावा: अस्पताल के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल स्टाफ के साथ हाथापाई और मारपीट की।
पुलिस की कार्रवाई: घटना की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिजनों व अस्पताल प्रबंधन को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
🗣️ अस्पताल प्रशासन की सफाई: 'पेट में ही बंद हो चुकी थी बच्चे की हरकत, ऑपरेशन से बचाई गई मां की जान'
दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है:
जनसंपर्क अधिकारी का बयान: यशोदा अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि महिला के रिश्तेदारों द्वारा गलत भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट: उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिला को जब अस्पताल लाया गया था, उससे पहले ही गर्भ के भीतर बच्चे की हलचल बंद हो चुकी थी। तत्काल कराए गए अल्ट्रासाउंड में पुष्टि हुई कि बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी थी।
मां की जान बचाई: परिजनों की लिखित सहमति के बाद डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन करके महिला (मां) की जान बचाई। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि परिजनों ने अस्पताल के ड्यूटी स्टाफ के साथ मारपीट की थी, जिसके बाद बीच-बचाव करना पड़ा।

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