गाजियाबाद: नवजात बच्चों को चोरी कर निसंतान दंपतियों को मोटी रकम में बेचने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का टीलामोड़ थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया...
गाजियाबाद: नवजात बच्चों को चोरी कर निसंतान दंपतियों को मोटी रकम में बेचने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का टीलामोड़ थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दो महिलाओं समेत कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए अगवा किए गए 3 माह के मासूम बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया है।
मामले में फरार चल रही दो अन्य महिलाओं की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। इस गिरोह का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को डीसीपी सिटी ने 25,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है।
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि 11 अगस्त को टीलामोड़ क्षेत्र निवासी फुरकान ने अपने 3 महीने के बेटे के अचानक चोरी हो जाने की एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़ित ने पड़ोसी नौशाद और उसकी पत्नी रुकसार को नामजद करते हुए आरोप लगाया था कि दोनों ने 9 अगस्त को उनके मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया। कांवड़ यात्रा के बीच हुई इस संवेदनशील घटना को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की मदद से कड़ियां जोड़ीं और 7 आरोपियों को धर दबोचा।
मामले में कांधला (शामली) निवासी सितारा और मौसीना अभी वांछित हैं, जिनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
👥 यह आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे: हरियाणा से लेकर यूपी-बिहार तक जुड़ा है नेटवर्क
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की सूची इस प्रकार है:
ऐनुल: मूल निवासी अररिया (बिहार), हाल निवासी पंडित कॉलोनी, पानीपत (हरियाणा)। (मास्टरमाइंड)
नागेंद्र उर्फ सुक्का: मूल निवासी मुजफ्फरनगर, हाल निवासी लोनी, गाजियाबाद। (मास्टरमाइंड)
नौशाद व रुकसार (पति-पत्नी): निवासी करन गेट चौकी के सामने, टीलामोड़, गाजियाबाद।
नसीम: निवासी मोहल्ला दरबार खुर्द, कैराना (शामली)।
आबिद: निवासी गांव सिलावर, आदर्श मंडी (शामली)।
सुमित्रा: निवासी गांव तैय्यबपुर, किशनगंज (बिहार)।
📱 रंग-रूप के आधार पर ऑन-डिमांड चोरी: 5 लाख रुपये में तय हुआ था मासूम का सौदा
एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए बताया:
डिमांड के अनुसार चोरी: गिरोह के सदस्य निसंतान दंपतियों की मांग (लड़का या लड़की और उनके रंग-रूप) के अनुसार बच्चों की रेकी करते थे। फोटो और वीडियो कॉल के जरिए खरीदार को बच्चा दिखाया जाता था।
पड़ोसी बने गद्दार: नौशाद और रुकसार पीड़ित फुरकान के पड़ोस में रहते थे और पिछले एक महीने से बच्चे पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने मास्टरमाइंड ऐनुल और सुक्का को बुलाकर रेकी कराई और हरियाणा के एक निसंतान दंपति से 5 लाख रुपये में सौदा पक्का कर लिया था।
मास्टरमाइंड का बैकग्राउंड: ऐनुल और सुक्का हरियाणा की एक फैक्टरी में काम करते थे। ऐनुल ने पैसे लेकर शादियां कराने का काम शुरू किया था, जहां उसकी पहचान निसंतान दंपतियों से हुई और उसने बच्चा चोरी का यह अवैध नेटवर्क खड़ा कर लिया।
😱 अपनी ही नवजात बेटी को 70 हजार में बेचा था: आरोपी दंपत्ति का खौफनाक सच
पुलिस पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी नौशाद और उसकी पत्नी रुकसार पहले भी अपनी खुद की औलाद का सौदा कर चुके हैं:
"नौशाद और रुकसार ने अपनी तीसरी संतान (नवजात बेटी) को ऐनुल और सुक्का के माध्यम से हरियाणा के एक निसंतान डॉक्टर दंपति को महज 70 हजार रुपये में बेच दिया था। इसके बाद वे ज्यादा पैसों के लालच में इस गिरोह के सक्रिय सदस्य बन गए और दूसरों के बच्चों की चोरी करने लगे।"
📍 मोबाइल ऑन होते ही मिली लोकेशन: पुलिस ऐसे पहुंची आरोपियों तक
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी नौशाद और रुकसार अपने बच्चों समेत फरार हो गए थे और अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए थे। हालांकि, जांच में पुलिस को रुकसार की बेटी का मोबाइल नंबर मिला था।
जैसे ही बेटी ने कैराना पहुंचकर अपना मोबाइल ऑन किया, पुलिस को सर्विलांस के जरिए तुरंत सटीक लोकेशन मिल गई। पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए मौके पर छापेमारी कर बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब गिरोह द्वारा पहले बेचे गए बच्चों को भी ट्रेस करने में जुटी है।

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