प्रो. डॉ. संत साह बोले—प्रेमचंद आज भी समाज के दर्पण, रचनाएं प्रेरणा का स्रोत सुगौली, 8 अगस्त 2026 : प्रेमचंद जयंती के उपरांत जन जागरण मंच, स...
प्रो. डॉ. संत साह बोले—प्रेमचंद आज भी समाज के दर्पण, रचनाएं प्रेरणा का स्रोत
सुगौली, 8 अगस्त 2026 : प्रेमचंद जयंती के उपरांत जन जागरण मंच, सुगौली के कार्यालय में 7 अगस्त को प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जन जागरण मंच के सचिव मधुरेन कुमार ने की, जबकि संचालन दृष्टि गुरुकुल पब्लिक स्कूल के निदेशक उदय प्रकाश श्रीवास्तव ने किया।
मुख्य वक्ता केसीटीसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. संत साह ने कहा कि प्रेमचंद समाज के दर्पण थे और उनकी रचनाएं आज भी सामाजिक चेतना के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने बताया कि प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के निकट लमही गांव में हुआ था और 8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हुआ। उनकी रचनाओं में समाज की वास्तविक परिस्थितियों और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावी चित्रण मिलता है।
संगोष्ठी में सुकुल पाकड़ उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक पंकज श्रीवास्तव, बेलवतिया मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रमोद श्रीवास्तव, राम बाबू पासवान, डॉ. प्रमोद स्टीफन, जन जागरण मंच के अध्यक्ष ऐनुल हक, राजा सिंह, संजय श्रीवास्तव, अवधेश कुमार वर्मा, राज किशोर शर्मा, अजीत पासवान, सकील अहमद, सुरेश प्रसाद, जयवर्द्धन और हिमांशु शर्मा सहित अनेक लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने प्रेमचंद की प्रमुख कृतियों—‘पूस की रात’, ‘गबन’, ‘कफन’, ‘पंच परमेश्वर’, ‘ईदगाह’, ‘दो बैलों की कथा’ और ‘बूढ़ी काकी’ सहित अन्य रचनाओं पर प्रकाश डाला।

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