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Shaheed Ramchandra Vidyarthi Deoria: 13 वर्ष की उम्र में तिरंगे के लिए हुए शहीद, देवरिया का नाम उनके नाम पर रखने की मांग

शहीद रामचंद्र विद्यार्थी की शहादत को नमन, बालकृष्ण प्रजापति बोले– देवरिया में उनके नाम पर जिला और प्रमुख शिक्षण संस्थान बने देवरिया, 14 अगस्...



शहीद रामचंद्र विद्यार्थी की शहादत को नमन, बालकृष्ण प्रजापति बोले– देवरिया में उनके नाम पर जिला और प्रमुख शिक्षण संस्थान बने

देवरिया, 14 अगस्त 2026 : उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के नवतन हथिया गांव में 1 अप्रैल 1929 को बाबूलाल प्रजापति के घर जन्मे रामचंद्र विद्यार्थी ने बचपन में ही देश की आजादी के आंदोलन में अपना जीवन समर्पित कर दिया था। बताया जाता है कि जब वह कक्षा सात के विद्यार्थी थे, तभी उनके मन में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष और देश को स्वतंत्र कराने का जुनून पैदा हो गया था। वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के बाद देशभर में स्वतंत्रता की भावना और तेज हो गई। इसी दौर में रामचंद्र विद्यार्थी भी आंदोलन से जुड़ गए और उन्होंने अंग्रेजी शासन के सामने तिरंगा फहराने का साहसिक निर्णय लिया।



बताया जाता है कि 14 अगस्त 1942 को देवरिया कचहरी परिसर में रामचंद्र विद्यार्थी अपने साथियों के साथ पहुंचे। वहां छात्रों ने एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर पिरामिड बनाया और रामचंद्र विद्यार्थी को उसके ऊपर पहुंचाया, ताकि वह कचहरी परिसर में तिरंगा फहरा सकें। जैसे ही उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराने का प्रयास किया, अंग्रेजी हुकूमत के सशस्त्र जवानों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इस गोलीबारी में रामचंद्र विद्यार्थी शहीद हो गए। उस समय उनकी उम्र महज 13 वर्ष बताई जाती है। इतनी कम उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले रामचंद्र विद्यार्थी का नाम देवरिया के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साहस और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।



बालकृष्ण प्रजापति ने कहा कि शहीद रामचंद्र विद्यार्थी की शहादत को केवल स्मरण करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी वीरगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बच्चे अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं, उस उम्र में रामचंद्र विद्यार्थी ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी शहादत युवाओं और विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रप्रेम, साहस और त्याग की प्रेरणा है। उन्होंने मांग की कि सरकार शहीद रामचंद्र विद्यार्थी की स्मृति में उनके नाम पर जिला और प्रमुख शिक्षण संस्थान स्थापित करे। साथ ही विद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर उनके जीवन एवं बलिदान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस महान बाल शहीद के योगदान को जान सकें।

बालकृष्ण प्रजापति ने कहा कि शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के नाम पर संस्थान और जिला स्थापित करना उनके बलिदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता अनेक ज्ञात-अज्ञात सेनानियों के त्याग से मिली है और ऐसे वीरों की गाथाओं को इतिहास तथा शिक्षा के माध्यम से समाज तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने देशवासियों की ओर से शहीद रामचंद्र विद्यार्थी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए सरकार से उनकी स्मृति को स्थायी रूप से संरक्षित करने और उनके नाम पर विकास एवं शैक्षिक संस्थान स्थापित करने की मांग दोहराई।






 

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