ग्रेटर नोएडा : महागुन मायवुड्स सोसाइटी के करीब 6,000 परिवार पिछले एक महीने से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। मंगलवार को भी जब घरों में पा...
ग्रेटर नोएडा : महागुन मायवुड्स सोसाइटी के करीब 6,000 परिवार पिछले एक महीने से गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। मंगलवार को भी जब घरों में पानी की आपूर्ति नहीं हुई, तो निवासियों का सब्र का बांध टूट गया।
आक्रोशित लोगों ने सोसाइटी के गेट नंबर-2 के सामने मुख्य सड़क को सुबह करीब 10 बजे से शाम 6 बजे तक यानी पूरे 8 घंटे तक जाम रखा। बाद में पुलिस और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा बिल्डर पर कार्रवाई का ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही निवासियों ने धरना समाप्त किया। लोगों का कहना है कि सोसाइटी में पिछले कई दिनों से टैंकर मंगाकर काम चलाया जा रहा था, लेकिन पिछले दो दिनों से स्थिति बेहद गंभीर हो गई क्योंकि टैंकर भी बंद कर दिए गए।
🚫 सोमवार रात भी हुआ था हंगामा: समाधान न मिलने पर मंगलवार सुबह सड़क पर उतरे लोग
पानी की किल्लत से आक्रोशित निवासियों का प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन जारी रहा:
मेंटेनेंस ऑफिस पर प्रदर्शन: निवासियों ने सोमवार देर रात मेंटेनेंस कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा किया था, लेकिन वहां से कोई समाधान नहीं निकला।
सुबह शुरू हुआ धरना: मंगलवार सुबह जब नलों में पानी नहीं आया, तो लोग सड़क पर उतर आए।
प्रशासनिक हस्तक्षेप: सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। शाम को बिल्डर के खिलाफ सख्त कदम उठाने के आश्वासन पर यातायात बहाल कराया जा सका।
🔄 प्राधिकरण और बिल्डर में खींचतान: एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने का आरोप
सोसाइटी के निवासियों ने दोनों ही पक्षों पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं:
पल्ला झाड़ने का खेल: लोगों का कहना है कि पानी की किल्लत को लेकर जब भी शिकायत की जाती है, तो प्राधिकरण और बिल्डर प्रबंधन एक-दूसरे पर दोष मढ़ देते हैं।
दावे और प्रतिदावे: प्राधिकरण का कहना है कि बिल्डर के आंतरिक प्रबंधन में कमी है, जबकि बिल्डर का तर्क है कि प्राधिकरण की ओर से ही मुख्य लाइन में पानी का दबाव पूरा नहीं मिल रहा है।
📑 प्राधिकरण ने सोसाइटी का लिया जायजा: बिल्डर के खिलाफ बिसरख थाने में एफआईआर के लिए दी तहरीर
मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया है:
अधिकारियों का निरीक्षण: प्राधिकरण के महाप्रबंधक (परियोजना) एके सिंह और वरिष्ठ प्रबंधक राजीव कुमार की टीम ने सोसाइटी का दौरा किया।
जलापूर्ति पाई गई पूरी: निरीक्षण के दौरान पाया गया कि यूजीआर (Underground Reservoir) तक प्राधिकरण द्वारा पर्याप्त पानी की आपूर्ति की जा रही है और जलापूर्ति में कोई कटौती नहीं है।
पुलिस में शिकायत: प्राधिकरण की छवि खराब करने और भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में जल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक की तरफ से बिल्डर प्रबंधन के खिलाफ बिसरख कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत दे दी गई है।
⚡ पानी के साथ बिजली और लिफ्ट का भी संकट: डिलीवरी बॉय व मेड का प्रवेश रोका गया
सोसाइटी में केवल पानी ही नहीं, अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी भारी बदहाली है:
बिजली व लिफ्ट की समस्या: निवासियों का आरोप है कि रोजाना 4 से 5 घंटे बिजली गुल रहती है और मजबूरी में डीजी (जनरेटर) का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ लोगों पर पड़ता है। आए दिन लिफ्ट खराब होने और लोगों के फंसने की घटनाएं भी हो रही हैं।
रोजमर्रा के काम प्रभावित: पानी के विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए सोसाइटी में डिलीवरी बॉय और घरेलू सहायिकाओं (मेड) का प्रवेश रोक दिया गया, जिससे लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई। हालांकि, बाद में इसका विरोध होने पर प्रवेश चालू कराया गया।
🗣️ बिल्डर मेंटेनेंस हेड का दावा: 'प्रेशर कम होने से आई समस्या, अब स्थिति सामान्य'
मामले पर सफाई देते हुए महागुन मायवुड्स के मेंटेनेंस हेड सत्येंद्र बालियान ने कहा कि प्राधिकरण की तरफ से पिछले तीन दिनों से पानी का प्रेशर कम आ रहा था, जिसके कारण अंडरग्राउंड वाटर टैंक पूरी तरह नहीं भर पा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि अब समस्या का समाधान कर लिया गया है और टैंकों को तेजी से भरने के लिए अतिरिक्त टैंकर भी मंगाए जा रहे हैं। उन्होंने निवासियों द्वारा लगाए गए अन्य सभी आरोपों को गलत बताया।

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