नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक ताजा रिपोर्ट में यह बड़ा और सनसनीखेज दावा किया गया है कि दिल्ली के लाल किले पर हुए आतंकी हमले के तार ...
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक ताजा रिपोर्ट में यह बड़ा और सनसनीखेज दावा किया गया है कि दिल्ली के लाल किले पर हुए आतंकी हमले के तार सीधे तौर पर अल-कायदा से जुड़े हुए थे। यूएन की इस आधिकारिक रिपोर्ट में आतंकी हमले के लिए ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, AQIS एक बिखरे हुए छोटे समूह से बदलकर एक खतरनाक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है। इसने बेहद तेजी से अपना लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क तैयार किया है। इसके अलावा, संगठन ने बड़े केंद्रित कैडर की जगह विकेंद्रीकरण (Decentralization) नीति अपनाते हुए छोटे और बिखरे हुए 'मॉड्यूल' (Cells) के रूप में काम करना शुरू किया है।
⚠️ बांग्लादेश में पांव पसार रहा है AQIS: NIA की चार्जशीट में 'टेरर इंजीनियरिंग' और AI के इस्तेमाल का खुलासा
यूएन की रिपोर्ट में इस बात को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है कि AQIS भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी अपने नेटवर्क को फैलाने और स्लीपर सेल्स बनाने की फिराक में है।
दूसरी ओर, दिल्ली के लाल किला बम धमाके की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मई 2026 में दाखिल अपनी चार्जशीट में चौंकाने वाली जानकारियां दी थीं:
टेरर इंजीनियरिंग में AI का उपयोग: एनआईए के अनुसार, अल-कायदा से जुड़े मॉड्यूल के आरोपियों ने 'टेरर इंजीनियरिंग' के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत इस्तेमाल किया था।
रॉकेट IED का परीक्षण: आरोपियों ने रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) तैयार किए थे और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड जंगलों में उनका सफल परीक्षण भी किया था।
7,500 पन्नों की चार्जशीट: 14 मई को दायर इस चार्जशीट में एनआईए ने बताया कि 10 नवंबर को हुए कार धमाके में आरोपियों ने IED बनाने के लिए बहुत ही बारीक और "लैबोरेटरी-ग्रेड" का वैज्ञानिक तरीका अपनाया था।
🏫 फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी आई जांच के दायरे में: 3 डॉक्टरों की भूमिका उजागर
एनआईए की विस्तृत जांच के दौरान हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है:
यूनिवर्सिटी में शरण: मामले का आरोपी जासिर बिलाल वानी 'तकनीकी मदद' देने के उद्देश्य से फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में रुका था।
डॉक्टरों की संलिप्तता: जांच में सामने आया कि इस यूनिवर्सिटी में काम करने वाले 3 डॉक्टर भी इस आतंकी साजिश में शामिल थे। इनमें से डॉ. अदील अहमद राथर ने मुख्य आरोपी जासिर की मुलाकात डॉ. उमर-उन-नबी से करवाई थी।
विस्फोटक से भरी कार: डॉ. उमर-उन-नबी ने ही धमाके के दिन विस्फोटक सामग्री से भरी कार चलाई थी। एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, इस भीषण विस्फोट में 11 मासूम लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
💻 YouTube और ChatGPT से सीखी बम बनाने की तकनीक: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का भयानक दुरुपयोग
जांच एजेंसी की पड़ताल में यह बात पूरी तरह शीशे की तरह साफ हो गई है कि किस तरह इंटरनेट और एआई प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था:
रॉ मैटेरियल की सप्लाई: आरोपी डॉ. अदील ने जासिर को IED बनाने के लिए जरूरी रसायन, जैसे NPK फर्टिलाइज़र (पोटेशियम नाइट्रेट) और पीसी हुई चीनी सप्लाई की थी।
रिसर्च और एआई का सहारा: आरोपी डॉ. उमर ने इम्प्रोवाइज़्ड रॉकेट IED पर विस्तृत रिसर्च की। जासिर ने YouTube और ChatGPT जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके यह सीखा कि "रॉकेट कैसे बनाया जाता है और उसमें रसायनों के मिश्रण का सही अनुपात कितना होना चाहिए।"
जंगलों में ट्रायल: जासिर ने डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल शकील और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर यह रॉकेट IED तैयार किया और काजीगुंड के जंगलों में जाकर इसका बकायदा ट्रायल रन भी किया था।

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