नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की वार्ड कमेटियों के चुनाव के बाद भाजपा के राजनीतिक गलियारों में "रिटर्न गिफ्ट" शब्द चर्चा ...
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की वार्ड कमेटियों के चुनाव के बाद भाजपा के राजनीतिक गलियारों में "रिटर्न गिफ्ट" शब्द चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि दूसरी पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए कई पार्षदों को चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन और स्थायी समिति जैसे महत्वपूर्ण पद मिले हैं, जबकि लंबे समय से पार्टी से जुड़े कई पुराने पार्षदों को जिम्मेदारी नहीं मिल सकी।
राजनीतिक चर्चाओं के दौरान कुछ कार्यकर्ता और समर्थक व्यंग्यात्मक अंदाज में इसे "रिटर्न गिफ्ट" की संज्ञा दे रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों तक संगठन के लिए काम करने वाले कई पुराने कार्यकर्ता अभी भी अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि हाल में पार्टी में शामिल हुए नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल गई हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस विषय को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं और टिप्पणियां सुनने को मिल रही हैं। हालांकि, पदों का चयन और जिम्मेदारियों का निर्धारण पूरी तरह पार्टी नेतृत्व का विशेषाधिकार है और इसे लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल एमसीडी की वार्ड कमेटियों के गठन के बाद भाजपा के भीतर पदों के वितरण को लेकर चल रही यह चर्चा राजनीतिक हलकों में लगातार सुर्खियां बटोर रही है।
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