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विवाद, राजनीतिक दांवपेच और यू-टर्न... दिल्ली में 15 साल पुरानी गाड़ियों पर रोक की कहानी पुरानी

दिल्ली में वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला एक बार फि...


दिल्ली में वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला एक बार फिर सुर्खियों में है। यह नीति, जो 1 जुलाई 2025 से लागू होने वाली थी, जनता के भारी विरोध और तकनीकी चुनौतियों के कारण स्थगित कर दी गई है। इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। कभी आप सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी इस नीति को लागू करने में ढिलाई बरती थी। दिल्ली में 15 साल पुराने वाहनों पर प्रतिबंध की कहानी नई नहीं है।


जनता की नाराजगी का पलड़ा भारी


दिल्ली, जो दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है, में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अप्रैल 2025 में आदेश जारी किया था कि 1 जुलाई से पुराने वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। इस नीति के तहत, 498 पेट्रोल पंपों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) कैमरे लगाए गए, ताकि 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों की पहचान की जा सके। इन वाहनों को सड़कों से हटाने और स्क्रैप करने की योजना थी।


हालांकि, इस फैसले ने दिल्ली की सड़कों पर तूफान खड़ा कर दिया। अनुमानित 62 लाख वाहन, जिनमें 41 लाख दोपहिया शामिल हैं, इस प्रतिबंध के दायरे में आते हैं। आम जनता, खासकर निम्न और मध्यम वर्ग, जिनके लिए पुराने वाहन रोजमर्रा की जरूरत हैं, ने इस नीति को 'तुगलकी फरमान' करार दिया। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, लोगों ने इसे अव्यावहारिक और आर्थिक रूप से बोझिल बताते हुए विरोध जताया।


तकनीकी खामियां और कानूनी उलझनें


दिल्ली सरकार ने इस नीति को लागू करने में कई तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का हवाला दिया। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने CAQM को पत्र लिखकर कहा कि ANPR सिस्टम पूरे एनसीआर में एकीकृत नहीं है, और कई पेट्रोल पंपों पर लगे कैमरे सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा, पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन ने तर्क दिया कि ईंधन को आवश्यक वस्तु माना जाता है, और इसे देने से मना करना आवश्यक वस्तु अधिनियम का उल्लंघन हो सकता है। पंप कर्मचारियों को प्रवर्तन अधिकारी की भूमिका निभाने के लिए मजबूर करना भी विवादास्पद रहा, क्योंकि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।


राजनीतिक घमासान


देखा जाए तो इस नीति पर बीजेपी और AAP दोनों ने दूरी बनाई है। बीजेपी सरकार ने शुरू में इस प्रतिबंध को प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम बताया था। पर्यावरण मंत्री सिरसा ने मार्च 2025 में घोषणा की थी कि 31 मार्च के बाद पुराने वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा। लेकिन जनता के गुस्से और तकनीकी दिक्कतों के बाद, सरकार ने 3 जुलाई 2025 को CAQM से इस आदेश को स्थगित करने की अपील की।


वहीं, AAP ने इस नीति को 'बीजेपी का तुगलकी फरमान' करार देते हुए इसका विरोध किया। पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि यह नीति आम लोगों, खासकर दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करेगी। AAP ने दावा किया कि बीजेपी इस नीति के जरिए वाहन निर्माता कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि AAP सरकार ने भी 2018 में सुप्रीम कोर्ट और NGT के आदेशों के बावजूद इस नीति को पूरी तरह लागू नहीं किया था, जिसे अब बीजेपी सरकार ने उलाहना दिया है।


पहले भी यू-टर्न की कहानी


यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध को लेकर यू-टर्न लिया गया है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। उस समय AAP सरकार ने इस नीति को लागू करने में ढिलाई बरती, जिसके कारण जब्त किए गए वाहनों को छुड़ाना मुश्किल हो गया। अब बीजेपी सरकार भी उसी राह पर चलती दिख रही है, जहां जनता का दबाव और तकनीकी खामियां नीति को लागू करने में बाधा बन रही हैं।




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