दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर ग्रेटर नोएडा के एक छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी न...
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर ग्रेटर नोएडा के एक छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब शीर्ष अदालत का निर्देश था कि दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की। इसके बाद यूपी पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी कर जिलाधिकारी मेधा रूपम का बचाव करते हुए कहा कि यह नोटिस गलती से जारी हुआ था।
📝 2. पुलिस ने कहा- उच्चाधिकारियों को भनक लगते ही 5 सितंबर को निरस्त कर दिया गया था नोटिस, लापरवाह कर्मचारियों पर शुरू हुई विभागीय कार्रवाई
ग्रेटर नोएडा के डीसीपी ने सोशल मीडिया पर जारी स्पष्टीकरण में बताया कि ईकोटेक प्रथम इलाके के निवासी छात्र अक्षत त्रिपाठी को 4 सितंबर को शांति व्यवस्था बनाए रखने का नोटिस कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय द्वारा जारी किया गया था। पुलिस के अनुसार, जैसे ही उच्चाधिकारियों को इस गलती का पता चला, 5 सितंबर को इसे तुरंत निरस्त कर दिया गया। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
👨⚖️ 3. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा- कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने कैसे किया आदेश का उल्लंघन? वरिष्ठ वकील ने इसे बताया सीधे तौर पर अदालत की अवमानना
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने गहरी नाराजगी जताते हुए पूछा कि स्पष्ट आदेश के बावजूद ऐसा नोटिस कैसे जारी किया जा सकता है। वरिष्ठ वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने इसे सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश का उल्लंघन और प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना बताया। सीजेआई ने इस पर सहमति जताते हुए वकील से सभी तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा, ताकि कार्यकारी मजिस्ट्रेट से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा जा सके।

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