उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ से सहायक पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव ने सहारनपुर पहुंचकर हाल ही में सामने आई प्राचीन संरचना का ब...
उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ से सहायक पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव ने सहारनपुर पहुंचकर हाल ही में सामने आई प्राचीन संरचना का बारीकी से निरीक्षण किया. अधिकारी ने खुद इसके अंदर उतरकर जांच की और बताया कि प्रथम दृष्टया यह उत्तर-मध्यकालीन वास्तुकला से संबंधित लखौरी ईंटों से निर्मित कुएं जैसी संरचना प्रतीत होती है, जो करीब 200 से 250 वर्ष पुरानी हो सकती है.
🧱 2. लखौरी ईंटों और चूना-सुर्खी से तैयार की गई है संरचना, धरातल से करीब 20 फीट है गहराई
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि इस संरचना की गहराई धरातल से लगभग 20 फीट और इसका व्यास करीब 3 फीट है. इसमें इस्तेमाल की गई लखौरी ईंटों का आकार 20×10×5 सेंटीमीटर है और इन्हें चूना-सुर्खी यानी लाइम मोर्टार से जोड़ा गया है. साथ ही इसके ऊपरी हिस्से पर चूने का प्लास्टर और ढाई से तीन फीट तक मिट्टी का डिपॉजिट भी पाया गया है.
🔍 3. मुगल शासक से जोड़ने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी, बिना प्रमाण के इतिहास नहीं लिखा जा सकता— पुरातत्व अधिकारी
जब इस संरचना को मुगल शासक शाहजहां या किसी धार्मिक स्थल से जोड़े जाने को लेकर सवाल किया गया, तो अधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी पुरातात्विक अवशेष को केवल अनुमान के आधार पर किसी शासक से नहीं जोड़ा जा सकता. इसके लिए सिक्का, मुहर या अन्य प्रामाणिक साक्ष्य होना अनिवार्य है. फिलहाल सुरक्षा कारणों से इस प्राचीन संरचना के मुंह को सुरक्षित तरीके से ढक दिया गया है और आगे की कार्रवाई नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करेगी.

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