दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी नगर पालिका क्षेत्र की करीब तीन लाख इमारतों, दुकानों और खाली जमीनों का अब ड्रोन कैमरों के जरिए डिजिटल सर्वे क...
दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी नगर पालिका क्षेत्र की करीब तीन लाख इमारतों, दुकानों और खाली जमीनों का अब ड्रोन कैमरों के जरिए डिजिटल सर्वे कराया जाएगा. अनियोजित तरीके से बसी कॉलोनियों में नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त करने और सभी संपत्तियों को प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में लाने के लिए जीआईएस (GIS) और जीपीएस (GPS) आधारित मैपिंग की जाएगी, जिसके पूरा होने के बाद हर संपत्ति को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UID) दिया जाएगा.
📍 2. तैयार होगा शहर का 3D नक्शा, आगजनी या मेडिकल इमरजेंसी के दौरान एम्बुलेंस और दमकल के लिए रास्ता ढूंढना होगा आसान
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी के अनुसार, इस डिजिटल सर्वे के माध्यम से शहर का एक सटीक 3D नक्शा तैयार किया जाएगा. संकरी गलियों वाले इलाकों में कई बार आगजनी या मेडिकल इमरजेंसी के समय दमकल की गाड़ियां और एम्बुलेंस रास्ता भटक जाती हैं, लेकिन यूआईडी के साथ जीपीएस लोकेशन ऐप पर दर्ज हो जाने से आपातकालीन वाहन बिना समय गंवाए सीधे मौके पर आसानी से पहुंच सकेंगे.
💰 3. बढ़ेगा नगर पालिका का राजस्व, अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए जीडीए के साथ साझा होगा डिजिटल डेटा
फिलहाल लोनी पालिका केवल 1.43 लाख भवनों से ही सालाना करीब 18 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स वसूल पाती है, जबकि संपत्तियों की कुल संख्या तीन लाख से अधिक है. सर्वे के बाद टैक्स का दायरा दोगुने से ज्यादा होने से राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी. इसके अलावा, ड्रोन और जीपीएस डेटा से तालाबों, हरित पट्टी और बंजर भूमि का सटीक सीमांकन होगा, जिससे अवैध निर्माण व भूमाफियाओं पर रोक लगेगी और इस डिजिटल डेटा को जीडीए के साथ भी साझा किया जाएगा.

कोई टिप्पणी नहीं