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Ex-Air Force Officer Reinstatement: युद्ध-विधवा और पूर्व अधिकारी प्रियंका सक्सेना की नौकरी में वापसी, SC ने अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए वायुसेना की एक पूर्व महिला अधिकारी को लगभग 14 साल के लंबे अंतराल के बा...

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए वायुसेना की एक पूर्व महिला अधिकारी को लगभग 14 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से सेवा में बहाल करने का बड़ा आदेश दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला बेहद अनोखा है क्योंकि अपीलकर्ता न केवल खुद एक पूर्व एयर फोर्स अधिकारी हैं, बल्कि वह एयर फोर्स के एक वीर अधिकारी की युद्ध-विधवा भी हैं. अदालत ने इस फैसले को एक बार के लिए अपवाद स्वरूप बताते हुए स्कूल जाने वाली उनकी दो छोटी बेटियों की परवरिश को ध्यान में रखते हुए उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाया है.

🎖️ 2. अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का उपयोग, एक साल की रिफ्रेशर ट्रेनिंग के बाद स्क्वाड्रन लीडर के रूप में होंगी नियुक्त

21 सितंबर को जारी किए गए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए इस मामले को बिना किसी नजीर (मिसाल) के एक अकेले मामले के तौर पर देखा जाए. कोर्ट ने पूर्व एयर फोर्स अधिकारी प्रियंका सक्सेना को एक साल की रिफ्रेशर ट्रेनिंग पूरी करने और जरूरी मेडिकल शर्तें तय करने का निर्देश दिया है. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें सर्विस के ग्यारहवें साल में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर दोबारा बहाल किया जाएगा, क्योंकि उन्होंने अपने शॉर्ट सर्विस कमीशन के दसवें साल यानी 2012 में सर्विस छोड़ दी थी.

✈️ 3. मिग-21 दुर्घटना में पति के निधन के बाद शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई, कोर्ट ने नीतिगत कमियों पर जताई चिंता

प्रियंका सक्सेना ने जनवरी 2002 में एयर फोर्स एकेडमी ज्वाइन की थी और अपनी उत्कृष्ट सेवा के लिए कमांडिंग-इन-चीफ से कमेंडेशन अवॉर्ड भी प्राप्त किया था. मई 2012 में पहली बेटी के जन्म और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने सर्विस छोड़ दी थी, लेकिन दुर्भाग्य से 2021 में जैसलमेर के पास एक मिग-21 बाइसन विमान दुर्घटना में उनके पति विंग कमांडर हर्षित सिन्हा का निधन हो गया. इसके बाद उन्होंने नौकरी पर लौटने के लिए आवेदन किया था, जिसे उम्र सीमा का हवाला देकर खारिज कर दिया गया था. आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल से निराशा मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने युद्ध-विधवाओं के पुनर्वास की मौजूदा नीतियों में कमियों को देखते हुए उन्हें यह ऐतिहासिक राहत प्रदान की है.







 

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