दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को ओलंपियन विनेश फोगट की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय कुश्ती संघ (WFI) से औपचारिक जवाब तलब किया है। इस य...
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को ओलंपियन विनेश फोगट की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय कुश्ती संघ (WFI) से औपचारिक जवाब तलब किया है। इस याचिका में विनेश फोगाट ने उनके खिलाफ जारी किए गए दो कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस और उसके बाद की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को चुनौती दी है। फोगाट ने मुख्य रूप से 9 मई और 17 जून को मिले नोटिसों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि फेडरेशन की इन शक्तियों का इस्तेमाल उनके मातृत्व के बाद प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी को प्रभावित करने के लिए किया गया है।
⚖️ 2. मातृत्व के बाद वापसी में बाधा और चयन प्रक्रिया से बाहर करने का गंभीर आरोप
याचिका के अनुसार, इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने 3 जुलाई 2025 को ही यह पुष्टि कर दी थी कि विनेश फोगाट 1 जनवरी 2026 से प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह योग्य होंगी। हालांकि, सभी जरूरी शर्तें पूरी होने के बावजूद WFI ने एक नया पात्रता ढांचा अपनाकर उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया। फोगाट का तर्क है कि पहला कारण बताओ नोटिस पुराने और बेबुनियाद नियमों पर आधारित था, जिसमें बिना किसी ठोस साक्ष्य के उन पर आरोप मढ़े गए और गोंडा टूर्नामेंट जैसे बदलाव करके उनके अधिकारों को सीमित किया गया।
🏛️ 3. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने केंद्र, WFI और IOA को जारी किया नोटिस, नवंबर में होगी अगली सुनवाई
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने विनेश फोगाट की एक अन्य महत्वपूर्ण याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें मांग की गई है कि गर्भावस्था और प्रसूति के बाद खेलों में वापसी करने वाली महिला एथलीटों के लिए एक निष्पक्ष, पारदर्शी व संरचित नीति बनाई जाए ताकि उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने केंद्र सरकार, WFI और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) को नोटिस जारी कर दिया है, और इस मामले की अगली सुनवाई अब नवंबर महीने के लिए सूचीबद्ध की गई है।

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