दिल्ली हाई कोर्ट ने आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि उम...
दिल्ली हाई कोर्ट ने आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों की तरफ से एक लाख रुपए की जमानत राशि केवल उनके माता-पिता ही नहीं, बल्कि कोई भी ऐसा सक्षम व्यक्ति दे सकता है जो यह राशि देने की स्थिति में हो। अदालत ने माना कि यह शर्त संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए उचित है, लेकिन इसमें यह लचीलापन होना चाहिए कि बॉन्ड कोई भी गार्जियन या समर्थक दे सके।
🏛️ 2. आइसा कार्यकर्ताओं की याचिका पर हुई सुनवाई, डीयू ने संपत्ति बचाने के लिए जरूरी बताया नियम
यह मामला 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (आइसा) के दो कार्यकर्ताओं अनन्या रतूड़ी और अक्षत शिखर द्वारा उच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में डूसू चुनाव समिति के उस शपथपत्र को चुनौती दी गई थी जिसमें माता-पिता की सहमति और 1 लाख रुपए की जमानत अनिवार्य की गई थी। सुनवाई के दौरान डीयू के वकील ने दलील दी कि यह शर्त केवल चुनाव के दौरान दीवारों और कॉलेज की संपत्ति को खराब होने से रोकने के लिए है।
👩🎓 3. जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने सुनाया फैसला, वयस्क छात्रों की स्वायत्तता और महिला उम्मीदवारों के मुद्दों पर भी हुई चर्चा
जस्टिस जसमीत सिंह ने आदेश स्पष्ट करते हुए कहा कि जरूरी नहीं कि सिर्फ माता-पिता ही जमानत दें, जिसके पास भी वित्तीय साधन हों, वह भुगतान कर सकता है। वहीं, याचिका में आरोप लगाया गया था कि यह शर्त वयस्क छात्रों की स्वायत्तता को प्रभावित करती है और खासकर आर्थिक रूप से कमजोर या महिला छात्रों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल बना सकती है। अदालत ने पूरी स्थिति का जायजा लेते हुए नियमों में आंशिक राहत प्रदान की है।

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