Page Nav

HIDE

Breaking News:

latest

Delhi Electricity Subsidy Audit: बिना बिजली इस्तेमाल किए मिलते रहे पैसे, 50 हजार से ज्यादा घरों में एक साल से जीरो खपत

दिल्ली में उपभोक्ताओं द्वारा बिजली का इस्तेमाल न किए जाने के बावजूद लाखों कनेक्शनों पर सरकारी बिजली सब्सिडी मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आय...

दिल्ली में उपभोक्ताओं द्वारा बिजली का इस्तेमाल न किए जाने के बावजूद लाखों कनेक्शनों पर सरकारी बिजली सब्सिडी मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली में 3.1 लाख से ज्यादा ऐसे बिजली कनेक्शनों पर सब्सिडी जारी रही, जिनमें लगातार कई महीनों तक बिजली की खपत शून्य (Zero) रिकॉर्ड की गई थी। इनमें 50 हजार से अधिक कनेक्शन ऐसे थे, जिनमें एक साल से भी अधिक समय तक बिजली की कोई खपत नहीं हुई और इन पर कुल 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी बांटी गई।

📊 2. लगातार 12 महीने तक जीरो रही खपत, 50 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं को मिले 17.81 करोड़

CAG ने दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी व्यवस्था का वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक गहन ऑडिट किया। रिपोर्ट के अनुसार, 50 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने लगातार 12 महीने या उससे ज्यादा समय तक बिजली का इस्तेमाल नहीं किया, इसके बावजूद उन्हें 17.81 करोड़ रुपये की सब्सिडी का लाभ दिया गया। इसके अलावा, 90 हजार से अधिक ऐसे उपभोक्ता रहे जिनके कनेक्शन पर 6 से 11 महीने तक शून्य खपत रही और उन्हें 11.88 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। वहीं, 1.70 लाख से ज्यादा कनेक्शनों पर 3 से 5 महीने तक कोई खपत न होने के बावजूद 12.57 करोड़ रुपये की सब्सिडी सरकारी खजाने से जारी की गई।

🔍 3. सीएजी ने नीति की खामियों पर उठाया सवाल, वर्ष 2022-23 में बढ़कर 3161 करोड़ रुपये हो गया था सब्सिडी का खर्च

CAG ने इस व्यवस्था को बिजली सब्सिडी नीति की एक बड़ी खामी करार देते हुए कहा है कि लंबे समय से निष्क्रिय (Dormant) पड़े कनेक्शनों पर सब्सिडी का इस तरह खर्च होना पूरी तरह व्यर्थ है। ऑडिट में सुझाव दिया गया है कि यदि बिजली खपत के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण किया जाए, तो सरकार जरूरतमंद और पात्र उपभोक्ताओं के लिए अधिक प्रभावी ढंग से नीति बना सकती है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में साल 2019-20 के दौरान जहां बिजली सब्सिडी पर 2,405.59 करोड़ रुपये खर्च होते थे, वहीं वर्ष 2022-23 में यह राशि बढ़कर 3,161 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।







 

कोई टिप्पणी नहीं