नेशनल शिपिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य कैप्टन संजय पाराशर ने मध्य-पूर्व और हॉर्मुज क्षेत्र में बने मौजूदा तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मारे...
नेशनल शिपिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य कैप्टन संजय पाराशर ने मध्य-पूर्व और हॉर्मुज क्षेत्र में बने मौजूदा तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मारे गए भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये की सरकारी सहायता देने की पुरजोर मांग की है. उन्होंने कहा कि समुद्र की लहरों के बीच अपने परिवार के सदस्य को खोने वाले इन परिवारों को सरकार की ओर से हरसंभव वित्तीय और सामाजिक सहयोग मिलना बेहद जरूरी है. कैप्टन पाराशर दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में 'VR Maritime' द्वारा आयोजित 'नाविक मान-सम्मान गोष्ठी' को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे.
🚢 2. गोष्ठी में भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण पर मंथन, नाविकों को निशाना बनाए जाने की निंदा
इस विशेष गोष्ठी के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा, उनके रोजगार, कल्याण और ग्लोबल सप्लाई चेन में उनके अमूल्य योगदान पर गंभीर चिंतन किया गया. कैप्टन संजय पाराशर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है, लेकिन युद्ध और संघर्ष की इन विकट परिस्थितियों में भी शांतिप्रिय नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौर में जब पूरी दुनिया अपने घरों में बंद थी, तब भी इन्हीं नाविकों ने समुद्र में डटकर आवश्यक वस्तुओं, दवाइयों और ईंधन की आपूर्ति सुचारू रखी थी.
🛡️ 3. नौसेना के युद्धपोतों की भूमिका बढ़ाने और SWFS की योजनाओं को नाविकों तक पहुंचाने पर जोर
नाविकों की सुरक्षा को देश की प्राथमिकताओं में रखने की वकालत करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि हॉर्मुज और संवेदनशील क्षेत्रों में नाविकों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की गश्त और भूमिका को और बढ़ाया जाना चाहिए, जिसके लिए भारत सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए. इसके अलावा, बैठक में मौजूद पूर्व डीजी शिपिंग अमिताभ कुमार ने भी नाविकों की सुरक्षा पर बल देते हुए कहा कि सरकार के पास इस बात का पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए कि इस समय कितने भारतीय नाविक किस-किस जहाज पर तैनात हैं. साथ ही 'Seafarers Welfare Fund Society' (SWFS) की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर नाविक तक पहुंचाने की बात कही गई.

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