अमेरिका ने मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में ड्रोन वॉरफेयर को लेकर एक बेहद बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने पहल...
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में ड्रोन वॉरफेयर को लेकर एक बेहद बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने पहली बार एक बहुराष्ट्रीय और मल्टी-डोमेन अटैक ड्रोन टास्क फोर्स बनाने का आधिकारिक ऐलान किया है, जिसका नाम 'टास्क फोर्स फाल्कन स्ट्राइक' (Task Force Falcon Strike) रखा गया है। इस नई और आधुनिक टास्क फोर्स में अमेरिका के अलावा उसके क्षेत्रीय सहयोगी देश भी मिलकर काम करेंगे। इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल आसमान में उड़ने वाले ड्रोन ही नहीं, बल्कि समुद्र की सतह और समुद्र की गहराई (पानी के नीचे) में काम करने वाले मानवरहित (Unmanned) सिस्टम को भी शामिल किया गया है।
🌊 हवा, पानी की सतह और समुद्र के नीचे एक साथ हमला करने की होगी अचूक क्षमता
फाल्कन स्ट्राइक के जरिए अमेरिका एक ऐसा एकीकृत और साझा ड्रोन नेटवर्क तैयार करना चाहता है, जो हवा, पानी और समुद्र के नीचे—यानी तीनों प्रमुख डोमेन में एक साथ निगरानी और हमला करने की जबरदस्त क्षमता रखता हो। CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ अपनी सैन्य क्षमताओं और टेक्नोलॉजी को साझा करने से अमेरिका और उसके साझेदार देश बेहद कम समय में नई सैन्य क्षमताओं को विकसित और युद्ध के मैदान में तैनात कर सकेंगे। इस पूरी टास्क फोर्स का संचालन और स्टाफ अमेरिका के स्पेशल ऑपरेशंस कमांड सेंट्रल (SOCCENT) द्वारा संभाला जाएगा।
🎯 टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक की सफलता के बाद उठाया गया बड़ा और आक्रामक कदम
अमेरिका को इस तरह की साझा टास्क फोर्स बनाने की जरूरत क्यों पड़ी, इसके पीछे 'टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक' की सफलता बड़ा कारण है। करीब नौ महीने पहले बनाए गए स्कॉर्पियन स्ट्राइक को मध्य पूर्व में अमेरिका का पहला समर्पित वन-वे अटैक ड्रोन स्क्वाड्रन माना जाता है, जिसने दिसंबर 2025 में अमेरिकी युद्धपोत से पहला हवाई अटैक ड्रोन सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। इसके अलावा, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और जुलाई में ईरानी बंदरगाह सुविधाओं पर हमलों के दौरान समुद्री मानवरहित प्रणालियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था। अब अमेरिका इसी अनुभव और क्षमता को फाल्कन स्ट्राइक के जरिए पूरे मिडिल ईस्ट में अपने सहयोगी देशों के साथ विस्तार देने जा रहा है।

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