भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से शुक्रवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनु...
भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से शुक्रवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 14.13 अरब डॉलर की भारी-भरकम बढ़ोतरी के साथ बढ़कर लगभग 707 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। अगर इसे भारतीय मुद्रा (रुपये) में आंका जाए, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है, जिसके बाद यह बढ़कर 67.32 लाख करोड़ रुपये हो गया है। विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक मानी जाने वाली फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में इस हफ्ते 9.94 अरब डॉलर का उछाल आया और यह 574.62 अरब डॉलर हो गई।
🥇 गोल्ड रिजर्व और एसडीआर में भी शानदार तेजी, मार्च के मुकाबले भंडार में 15.89 अरब डॉलर का इजाफा
विदेशी मुद्रा भंडार के साथ-साथ देश के स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) में भी अच्छी खासी वृद्धि देखने को मिली है। समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान भारत का सोने का भंडार 3.99 अरब डॉलर बढ़कर 108.73 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में विशेष आहरण अधिकार यानी स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) 79 मिलियन डॉलर की बढ़त के साथ 18.745 अरब डॉलर हो गए, जबकि आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजीशन भी 116 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.894 अरब डॉलर दर्ज की गई। यदि मार्च 2026 के अंत से तुलना की जाए, तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक 15.894 अरब डॉलर अधिक हो चुका है, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।
📉 विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल के बावजूद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में रहा रुपया
एक तरफ जहां देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को भारतीय रुपये पर दबाव बना रहा। अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में रुपया शुरुआती कारोबार के दौरान 95.39 के स्तर पर खुला और दिनभर के कारोबार में यह 95.38 से 95.44 के दायरे में घूमने के बाद अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मात्र 3 पैसे की मामूली मजबूती के साथ 95.42 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। फॉरेक्स कारोबारियों के अनुसार, विदेशी निवेशकों (FPIs) द्वारा लगातार धन निकासी, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण रुपये की चाल पर दबाव बना हुआ है।

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