उत्तर प्रदेश में मॉनसून की सक्रियता के कारण लगातार हो रही भारी बारिश ने नदियां उफान पर ला दी हैं। इसका सबसे ज्यादा असर प्रयागराज में देखने क...
उत्तर प्रदेश में मॉनसून की सक्रियता के कारण लगातार हो रही भारी बारिश ने नदियां उफान पर ला दी हैं। इसका सबसे ज्यादा असर प्रयागराज में देखने को मिल रहा है, जहां गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर बेहद तेजी से बढ़ रहा है। नदियों के जलस्तर में हो रही इस बेतहाशा बढ़ोतरी को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। मौसम विभाग ने अगले एक सप्ताह तक राज्य में झमाझम बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
📈 2. महज आठ घंटे में 26 से 40 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर, पिछले 24 घंटों में एक मीटर की दर्ज हुई बढ़ोतरी
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को महज आठ घंटे के भीतर गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर 26 से 40 सेंटीमीटर तक बढ़ गया है। वहीं, पिछले 24 घंटों में अलग-अलग स्थानों पर इन दोनों नदियों के जलस्तर में एक मीटर तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। हालांकि वर्तमान में दोनों नदियां अपने चेतावनी बिंदु (83.73 मीटर) और खतरे के निशान (84.734 मीटर) से नीचे बह रही हैं, लेकिन जिस रफ्तार से पानी बढ़ रहा है, उससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
🚫 3. ग्रामीण इलाकों में भी दिखने लगा बाढ़ का असर, रिवर फ्रंट रोड डूबी और कई गांवों में घुसने लगा पानी
गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर का प्रभाव अब प्रयागराज के ग्रामीण और निचले इलाकों में साफ तौर पर नजर आने लगा है। गंगा किनारे बनी रिवर फ्रंट रोड पूरी तरह पानी में डूब चुकी है। इसके अलावा, नालों के रास्ते कई शहरी बस्तियों और गांवों में भी बाढ़ का पानी धीरे-धीरे प्रवेश करने लगा है। एहतियात के तौर पर संगम और नदी के आसपास के तमाम इलाकों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
🛡️ 4. सभी तटबंध सुरक्षित, लेकिन संवेदनशील इलाकों पर प्रशासन की पैनी नजर; आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सभी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि यदि नदियों के जलस्तर बढ़ने की रफ्तार यही रही, तो आने वाले दिनों में प्रयागराज के बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और संवेदनशील क्षेत्रों में राहत व बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

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