नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अपील पर 20 जुलाई को दिल्ली में 'संसद चलो मार्च' के दौरान कथित तौर पर पुलिस द्वारा किए गए बलप...
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अपील पर 20 जुलाई को दिल्ली में 'संसद चलो मार्च' के दौरान कथित तौर पर पुलिस द्वारा किए गए बलप्रयोग की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने की बात कही है।
हालांकि, सीजेपी ने इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कुछ शर्तें भी सामने रखी हैं। सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास और लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के बाहर स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं इस समिति की मांग नहीं की थी, लेकिन यदि कोर्ट कमेटी का गठन कर रहा है, तो इसके सदस्य पूर्णतः स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए। साथ ही, सीजेपी ने इस कमेटी में अपने प्रतिनिधि को भी शामिल करने की मांग की है।
👮♂️ जांच समिति में शामिल होंगे रिटायर्ड जज, पूर्व DGP और पूर्व CBI डायरेक्टर: बुधवार को जारी हो सकता है विस्तृत आदेश
कमेटी का ढांचा और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:
पीठ का गठन: चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
समिति के सदस्य: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, इस उच्च स्तरीय समिति में रिटायर्ड जज, एक पूर्व डीजीपी, पूर्व सीबीआई डायरेक्टर तथा अन्य विशेषज्ञ सदस्य शामिल होंगे।
सुझाव और आदेश: बेंच ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग पक्षों से सुझाव मिलने के बाद समिति के गठन का अंतिम आदेश बुधवार को जारी किया जाएगा।
🗣️ "कमेटी के सदस्य स्वतंत्र हों और निष्ठा पर न उठे सवाल": CJP सह-संयोजक सौरभ दास का बड़ा बयान
सौरभ दास का पक्ष:
"सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि प्रदर्शनकारियों को न्याय दिलाने के लिए कमेटी जरूरी है, तो यह कोर्ट का फैसला होगा। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी और देश के युवाओं की मांग है कि कमेटी के सदस्य पूरी तरह निष्पक्ष हों। उनके करियर का ट्रैक रिकॉर्ड साफ होना चाहिए। यदि विवादास्पद लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा, तो युवा इसे स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि देश का युवा सुप्रीम कोर्ट को ही न्याय का अंतिम स्तंभ मानता है।"
📜 कमेटी के सदस्यों के नाम सार्वजनिक हों और CJP के प्रतिनिधि शामिल किए जाएं: लीगल हेड रत्ना सिंह
रत्ना सिंह की मांगें और एफआईआर का मुद्दा:
वादे पूरे करने की मांग: सीजेपी की लीगल प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था कि छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) रद्द की जाएंगी।
समय सीमा: उन्होंने कहा कि प्रदर्शन खत्म होने के एक हफ्ते के भीतर इस वादे को पूरा किया जाना चाहिए था।
सत्यापन के लिए सदस्यता: रत्ना सिंह ने मांग की कि कमेटी के सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाएं और सीजेपी के सदस्यों को भी इसमें जगह दी जाए, ताकि दी जाने वाली जानकारियों का निष्पक्ष सत्यापन किया जा सके।

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