नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ पुलिस द्वारा किए गए बर्बरतापूर्ण व्यवहार से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सु...
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ पुलिस द्वारा किए गए बर्बरतापूर्ण व्यवहार से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान कहा, "हम एक कमेटी बना रहे हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, हाई कोर्ट के एक पूर्व चीफ जस्टिस और डायरेक्टर जनरल (DGP) के पद से रिटायर हुए एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह कमेटी हर पीड़ित की बात सुनेगी और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देगी।" सीजेआई ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल निर्दोष छात्रों का भविष्य किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होना चाहिए।
🚨 कमेटी में सीबीआई और पुलिस के पूर्व निदेशक भी होंगे शामिल: सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों पर उठे सवाल
अदालत में वकीलों की बहस और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:
जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देगी कोर्ट: सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि कोर्ट कमेटी को सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। कमेटी समय-समय पर अपनी सिफारिशें सौंपेगी, जिसके बाद आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
सादी वर्दी में पुलिस की जिम्मेदारी: सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने मुद्दा उठाया कि पुलिस ने स्वीकार किया है कि प्रदर्शन में सादी वर्दी में पुलिसकर्मी तैनात थे। जब सादी वर्दी में तैनात लोग महिलाओं से बदसलूकी और कानून का उल्लंघन करेंगे, तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
डोमेन एक्सपर्ट्स होंगे शामिल: सीजेआई ने बताया कि इस कमेटी में सीबीआई के पूर्व निदेशक और एक राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) की सहमति ले ली गई है, जो इस निष्पक्ष जांच का हिस्सा होंगे।
📜 निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने की मांग: सॉलिसिटर जनरल बोले- अपराधियों पर जारी रहे कार्रवाई
FIR रद्द करने और आपराधिक बैकग्राउंड पर पक्ष:
"सुनवाई के दौरान वकील वृंदा ग्रोवर ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग कर निर्दोष छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) रद्द करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि निर्दोष छात्रों पर राहत से आपत्ति नहीं है, लेकिन जिनके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उनके खिलाफ जांच जारी रहनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी सहमति जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले छात्रों और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों में स्पष्ट अंतर होना चाहिए।"
🎓 "निर्दोष छात्रों का भविष्य बर्बाद न हो": सीजेआई ने अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकारों की दिलाई याद
CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:
छात्रों के परिजनों की मेहनत: सीजेआई ने कहा कि यह उन निर्दोष छात्रों के भविष्य का सवाल है, जिनके परिजन दिन-रात मेहनत करके उन्हें पढ़ा रहे हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों का करियर किसी जांच या मुकदमे के कारण तबाह नहीं होना चाहिए।
विरोध का अधिकार (Article 19): मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब तक कानून तोड़ने का कोई आपराधिक इरादा न हो और मकसद केवल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को अधिकारियों तक पहुंचाना हो, तब तक ऐसे मामलों को आदतन अपराधियों द्वारा की गई हिंसा से बिल्कुल अलग माना जाना चाहिए।
2,873 आपराधिक रिकॉर्ड वाले चिन्हित: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि हत्या, डकैती, और POCSO जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े 2,873 लोगों की पहचान की गई है, जिनकी जांच एसआईटी (SIT) करेगी। इनके अलावा किसी भी अन्य साधारण प्रदर्शनकारी छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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