नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने देशभर में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों और हिंसा की निष्पक्ष जांच के...
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने देशभर में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों और हिंसा की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (High-Powered Committee) का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी करेंगे।
कमेटी में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई (CBI) के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एलआर बिश्नोई को बतौर सदस्य शामिल किया गया है।
🔍 पैलेट गन, सर्विलांस और महिला सुरक्षा की होगी जांच: शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था में संतुलन पर फोकस
जांच के प्रमुख बिंदु और दायरा:
बल प्रयोग व सर्विलांस: यह कमेटी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, पैलेट गन के इस्तेमाल, पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही और प्रदर्शनकारियों की डिजिटल निगरानी (Surveillance) की जांच करेगी।
महिला सुरक्षा व मुआवजा: महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न व छेड़छाड़ के आरोपों, घायलों को चिकित्सा सहायता और पीड़ितों के लिए मुआवजे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
अधिकार और संतुलन: कमेटी यह भी सुझाव देगी कि नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार और राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच उचित संतुलन कैसे कायम किया जाए।
📜 सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश: CCTV फुटेज सुरक्षित करने और हिरासत में लिए नाबालिगों को रिहा करने के आदेश
शीर्ष अदालत द्वारा जारी प्रमुख दिशा-निर्देश:
"कमेटी पुलिस की ज्यादतियों के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई हिंसा की भी समानांतर जांच करेगी। महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोपों को प्राथमिकता दी जाएगी। कोर्ट ने सख्त आदेश दिया है कि प्रदर्शनों के CCTV, ड्रोन, बॉडी कैम और PCR कॉल रिकॉर्ड को तुरंत सुरक्षित किया जाए। इसके अलावा, गंभीर व जघन्य मामलों को छोड़कर हिरासत में लिए गए सभी नाबालिगों को तुरंत रिहा करने और प्रदर्शनकारियों के पर्सनल डेटा की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।"
🏛️ NEET और पेपर लीक प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर हुआ फैसला: 10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की पृष्ठभूमि और आगामी कार्रवाई:
याचिकाओं का आधार: यह आदेश दिल्ली के जंतर-मंतर, बिहार और देश के अन्य हिस्सों में NEET तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के आरोपों को लेकर हुए उग्र प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाओं पर आया है।
दिशा-निर्देशों की मांग: याचिकाकर्ताओं ने देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए ऑल-इंडिया गाइडलाइंस की मांग की थी, जबकि कुछ याचिकाओं में पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
अगली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने जांच कमेटी से जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट सौंपने को कहा है। मामले से जुड़े बड़े संवैधानिक प्रश्नों पर कोर्ट बाद में विचार करेगा। प्रकरण की अगली सुनवाई 10 सितंबर को तय की गई है।

कोई टिप्पणी नहीं