नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता व डिग्री सार्वजनिक करने से जुड़ी याचिकाओं और अपीलों पर दिल्ली हाईकोर्ट अब 29 सितं...
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता व डिग्री सार्वजनिक करने से जुड़ी याचिकाओं और अपीलों पर दिल्ली हाईकोर्ट अब 29 सितंबर को सुनवाई करेगा।
यह तारीख मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने तय की है। गुरुवार को सुनवाई की शुरुआत में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया था, जिसके बाद अदालत ने अपने रोस्टर व कैलेंडर के अनुसार 29 सितंबर की तारीख मुकर्रर की।
⚖️ किन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दायर की है याचिका: जानिए पूरा मामला
डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित अपीलों की पृष्ठभूमि:
सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती: डिवीजन बेंच के सामने दायर की गई अपीलें दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ (Single Bench) के 25 अगस्त 2025 के उस फैसले के खिलाफ हैं, जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को रद्द कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता: इन अपीलों को आरटीआई कार्यकर्ता (RTI Activist) नीरज, आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता व सांसद संजय सिंह और एडवोकेट मोहम्मद इरशाद ने संयुक्त रूप से दायर किया है।
सीआईसी का 2016 का आदेश: 21 दिसंबर 2016 को सीआईसी ने वर्ष 1978 में बीए (BA) परीक्षा पास करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड की जांच करने की अनुमति दी थी। उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी के भी 1978 में ही डीयू से बीए उत्तीर्ण करने का दावा किया जाता है।
🎓 दिल्ली विश्वविद्यालय ने सीआईसी के आदेश को दी थी अदालत में चुनौती
विश्वविद्यालय और सीआईसी के बीच का कानूनी विवाद:
"सीआईसी के फैसले के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट का रुख किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अदालत के समक्ष संबंधित रिकॉर्ड पेश करने पर कोई आपत्ति व्यक्त नहीं की थी, लेकिन सीआईसी द्वारा दिए गए सार्वजनिक जांच के व्यापक निर्देश को रद्द करने की मांग की थी।"
📜 'RTI का काम सनसनी फैलाना नहीं': एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए कही थी यह बात
एकल पीठ के फैसले के मुख्य बिंदु:
निजी जानकारी की सुरक्षा: 25 अगस्त 2025 को सिंगल बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि कोई व्यक्ति संवैधानिक या सार्वजनिक पद पर है, इसका अर्थ यह नहीं कि उससे जुड़ी हर निजी जानकारी अपने आप सार्वजनिक करने योग्य हो जाती है।
सार्वजनिक हित की अनुपस्थिति: अदालत ने माना कि मांगी गई जानकारी में कोई विशेष अंतर्निहित सार्वजनिक हित (Public Interest) सिद्ध नहीं होता। आरटीआई (RTI) कानून का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है, न कि 'सनसनी के लिए सामग्री' जुटाना।
शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता: अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि देश में किसी भी सार्वजनिक या राजनीतिक पद को संभालने के लिए शैक्षणिक योग्यता कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है। अब 29 सितंबर को डिवीजन बेंच इन सभी कानूनी पहलुओं पर नए सिरे से सुनवाई करेगी।

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