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Safety of Indian Seafarers: विदेशों में काम करने वाले भारतीय नाविकों के लिए '24x7 इमरजेंसी मैकेनिज्म' की जरूरत, मुआवजे के लिए कड़े नियम की मांग

राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से आग्रह किया है कि वे संघर्ष और उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों (जैसे फारस की खाड़ी...


राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से आग्रह किया है कि वे संघर्ष और उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों (जैसे फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर) में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए राजनयिक और कांसुलर व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत करें। अपने पत्र में सांसद ने स्पष्ट किया कि नाविकों के लापता होने, घायल होने या मौत के मामलों में भारतीय परिवारों को विदेशी जहाज मालिकों और बीमा कंपनियों से मुआवजा पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

🚢 लापता ट्रेनी ऑफिसर शिंटन बेनी के मामले को उठाया विशेष रूप से

सांसद ब्रिटास ने कोच्चि के युवा ट्रेनी डेक ऑफिसर शिंटन बेनी का मामला उठाते हुए सरकार से त्वरित दखल की मांग की है। बेनी 12 अगस्त से लापता हैं, जब वे मित्सुई ओएसके लाइन्स द्वारा संचालित जहाज 'विक्टोरियस ऐस' पर सवार थे। सांसद ने विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि वह संबंधित भारतीय मिशनों के माध्यम से बेनी के सुरक्षित ठिकाने और उनकी स्थिति का पता लगाने के लिए हर संभव राजनयिक कदम तेजी से उठाए।

⚠️ सशस्त्र संघर्ष के बीच भारतीय नाविकों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा: 16 नागरिकों की मौत और 75 घायल

सांसद ने सरकार द्वारा राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से 16 भारतीय नागरिकों (जिनमें 10 नाविक शामिल हैं) की मौत हो चुकी है और 75 भारतीय घायल हुए हैं। यह आंकड़ा उन लोगों के सामने आने वाले भयानक खतरों को उजागर करता है जो युद्ध जैसे हालातों में भी वैश्विक व्यापार को जारी रखे हुए हैं। ब्रिटास ने मांग की है कि सरकार को 24x7 काम करने वाला एक 'डिस्ट्रेस कॉन्टैक्ट मैकेनिज्म' बनाना चाहिए ताकि संकट की घड़ी में नाविक या उनके परिजन सीधे भारतीय मिशनों से संपर्क कर सकें।

💰 मुआवजे के निपटारे के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र की आवश्यकता

सांसद के अनुसार, मौत के 16 मामलों में से अब तक केवल 5 में ही मुआवजा मिल पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की 'सीफेरर्स वेलफेयर फंड स्कीम' एक सराहनीय कदम है, लेकिन यह एम्प्लॉयर, जहाज मालिक या बीमा कंपनी द्वारा अनुबंध के तहत दिए जाने वाले कानूनी मुआवजे का विकल्प नहीं हो सकती। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह भारतीय दूतावासों को निर्देश दे कि वे नाविकों के परिवारों को मुआवजा और अन्य वाजिब बकाया राशि का शीघ्र निपटारा दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।







 

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