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ED Action On RCOM: 40,185 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी केस में ईडी का शिकंजा, रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में नई शिकायत दर्ज

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को नई दिल्ली के...


नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को नई दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष PMLA कोर्ट में एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (पूरक शिकायत) दायर की है।

यह शिकायत ECIR/STF/26/2025 और PMLA स्पेशल केस नंबर 20/2026 के तहत 27 मार्च, 2026 को दायर की गई मूल अभियोजन शिकायत के सिलसिले में दर्ज कराई गई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक, इस केस में प्रमुख आरोपी संस्थाओं और व्यक्तियों में M/s रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM), M/s रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL), गौतम भाईलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला तथा अन्य शामिल हैं। ये सभी आरोप 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 की धारा 4 के तहत दंडनीय अपराधों से संबंधित हैं। ED के अनुसार, यह जांच विभिन्न सार्वजनिक व निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों के आधार पर सीबीआई (CBI) की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों (FIRs) के तहत शुरू की गई थी।

इन मामलों में RCOM, RTL और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड द्वारा बैंकों से धोखाधड़ी के जरिए फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं हासिल करने और उनका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप शामिल हैं।

🔄 जांच में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का खुलासा: कर्ज घुमाने (एवरग्रीनिंग) और फंड डायवर्जन का आरोप

ED की विस्तृत जांच में लोन की रकम को डायवर्ट करने के लिए अपनाए गए जटिल पैटर्न का खुलासा हुआ है:

  • एवरग्रीनिंग और रोटेशन: जांच में सामने आया कि स्वीकृत क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल उन आधिकारिक उद्देश्यों के विपरीत किया गया जिनके लिए बैंक से मंजूरी मिली थी। फंड्स का उपयोग पुरानी घरेलू व विदेशी देनदारियां चुकाने, कर्ज को घुमाने (रोटेट करने) और लोन का लगातार नवीनीकरण करने के लिए किया गया, जिसे वित्तीय भाषा में 'एवरग्रीनिंग' कहा जाता है।

  • लेयरिंग और शेल कंपनियां: एजेंसी का आरोप है कि इन फंड्स को कई परतों (लेयर्स) के जरिए घुमाया गया, जिसमें ग्रुप कंपनियां, माध्यम के तौर पर इस्तेमाल होने वाली संस्थाएं (Conduit Entities), विभिन्न बैंक खाते और लिक्विड म्यूचुअल फंड्स शामिल थे।

  • विदेशी देनदारियों का भुगतान: इन फंड्स का इस्तेमाल मौजूदा एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) और फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (FCCB) देनदारियों को चुकाने के लिए किया गया, जबकि कागजों में इन लेन-देन को वैध व्यावसायिक खर्च या प्राप्तियों के तौर पर दिखाया गया।

⚖️ 2007 से जारी थीं आपराधिक गतिविधियां: विदेश में निजी संपत्तियां खरीदने और मुनाफा बढ़ाने में हुआ इस्तेमाल

ED के अनुसार, यह कथित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला कम से कम वर्ष 2007 में शुरू हुआ और उसके बाद भी आपस में जुड़ी आपराधिक गतिविधियों के तौर पर लगातार जारी रहा:

  • ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर: जांच में पाया गया कि बैंक लोन से मिली राशि को M/s रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और M/s रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी समूह की अन्य कंपनियों में अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया।

  • प्रमोटरों की निजी संपत्ति: इसके अलावा, यह बात भी सामने आई है कि फंड का एक बड़ा हिस्सा प्रमोटरों के लिए भारत के बाहर (विदेशों में) निजी अचल संपत्तियां खरीदने और RCOM के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए कर्ज चुकाने में किया गया।

💰 ₹40,185.55 करोड़ की 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime): FCCB फंड्स का हुआ गलत इस्तेमाल

ED ने इस पूरे मामले में 'अपराध से हुई कुल कमाई' (Proceeds of Crime) का अनुमान ₹40,185.55 करोड़ लगाया है:

  • बैंकों का बकाया: एजेंसी के अनुसार, यह वह कुल बकाया रकम है जिसे कर्ज लेने वाली कंपनियां बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डहोल्डर्स के समूह को लौटाने में विफल रहीं।

  • झूठा सर्टिफिकेशन: जांच में आरोपियों द्वारा फंड जुटाने, उसका इस्तेमाल करने, उसे छिपाने और गलत तरीके से पेश करने की अलग-अलग भूमिकाएं साबित हुई हैं। ED ने FCCB के जरिए जुटाए गए लगभग US$ 1 बिलियन (1 अरब अमेरिकी डॉलर) के फंड के अंतिम इस्तेमाल के बारे में दिए गए फर्जी व गलत सर्टिफिकेशन का भी विशेष उल्लेख किया है।

🏛️ ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियां कुर्क: दो आरोपी जेल में, आगे की जांच जारी

मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा संपत्तियों की कुर्की और आरोपियों की गिरफ्तारी से संबंधित अपडेट्स:

  • संपत्तियों की अटैचमेंट: ED ने ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को अटैच करने की मांग की है, जिसे एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने पहले ही कुर्क (Attach) और कन्फर्म कर दिया है। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में स्थित लीजहोल्ड व अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं।

  • दो आरोपी गिरफ्तार: इस ECIR मामले में आरोपी गौतम भाईलाल दोषी और सतीश सेठ को क्रमशः 12 जून, 2026 और 9 जुलाई, 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।

  • कोर्ट का संज्ञान: विशेष PMLA कोर्ट ने 15 जून, 2026 को इस मामले में दायर मूल अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लिया था। ED का कहना है कि इस बड़े वित्तीय घोटाले में अन्य कड़ियों की आगे की जांच जारी है।







 

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