अयोध्या राम मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम ...
अयोध्या राम मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में मंदिर प्रबंधन के सुचारू और पारदर्शी संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा निकाली गई CEO पद की भर्ती के लिए लगभग 5,300 लोगों ने आवेदन किया है, जिनमें देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रशासनिक और प्रबंधन विशेषज्ञ शामिल हैं।
इसी बीच, CEO की नियुक्ति को लेकर संत समाज की ओर से एक बड़ी और महत्वपूर्ण मांग सामने आई है। संत समाज का स्पष्ट कहना है कि मंदिर और आश्रमों की प्राचीन परंपराओं की गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति को ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO का पद सौंपा जाना चाहिए। मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा, जहां सदस्यों ने 'रामानंदी परंपरा' से जुड़े और मठ-मंदिरों के संचालन का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति को ही यह जिम्मेदारी दिए जाने की वकालत की।
📜 आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण का बड़ा वक्तव्य: केवल प्रशासनिक अधिकारियों के भरोसे न चले मंदिर प्रबंधन
ट्रस्ट की नवगठित धार्मिक समिति के सदस्य एवं सिद्धपीठ हनुमन्निवास के महंत आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने CEO नियुक्ति पर अपने विचार साझा किए:
ईश्वर के प्रति निष्ठा अनिवार्य: आचार्य ने कहा कि धार्मिक स्थलों और बड़े मंदिरों को केवल कॉर्पोरेट या प्रशासनिक CEO के माध्यम से नहीं चलाया जाना चाहिए। मंदिर की व्यवस्था और अधिकारों की बागडोर उन्हीं हाथों में होनी चाहिए जिनकी भगवान और सनातन परंपरा के प्रति अटूट निष्ठा हो।
संस्कृति और परंपरा का ज्ञान: मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इस पद के लिए ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिसका पूरा जीवन मठ-मंदिर, गुरुकुल और आश्रम की परंपराओं में बीता हो तथा जिसे पूजा-पद्धति की गहरी जानकारी हो।
⚖️ प्रशासनिक क्षमता के साथ धार्मिक समझ का संतुलन जरूरी: संत समाज की चेतावनी
राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाए रखने को लेकर संतों ने अपनी चिंता जताई है:
केवल अनुभव काफी नहीं: संत समाज का मानना है कि केवल प्रशासनिक अनुभव को ही चयन का एकमात्र आधार न बनाया जाए। प्रशासनिक दक्षता रखने वाला व्यक्ति व्यवस्था तो बना सकता है, लेकिन उसकी प्राथमिक निष्ठा भगवान के बजाय केवल प्रशासनिक तंत्र के प्रति होने की आशंका बनी रहती है।
भूमिका और अधिकार हों स्पष्ट: 22 जुलाई की बैठक में धार्मिक समिति के सदस्य बने आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने स्पष्ट किया कि देश के कई बड़े मंदिरों (जैसे तिरुपति या वैष्णो देवी) में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा व्यवस्थाएं संभाली जा रही हैं। यदि राम मंदिर में भी CEO नियुक्त होता है तो वे इसका सीधा विरोध नहीं करेंगे, बशर्ते उसकी भूमिका, सीमाएं और अधिकार पूरी तरह से स्पष्ट तय किए जाएं।
🚩 नवगठित धार्मिक समिति की पहली बैठक संपन्न: 15 अगस्त को गाजे-बाजे के साथ निकलेगी रामलला की पालकी यात्रा
अयोध्या स्थित श्री रामवल्लभा कुंज मंदिर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नवगठित धार्मिक समिति की पहली औपचारिक बैठक आयोजित की गई:
प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी: लगभग 3 घंटे तक चली इस बैठक में ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन, समिति सदस्य आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत रामानंद दास, महंत राजकुमार दास सहित कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। वहीं, समिति के अध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
पालकी यात्रा का बड़ा निर्णय: बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आने वाले 15 अगस्त को शाम करीब 5 बजे राम मंदिर के पवित्र गर्भगृह से गाजे-बाजे और भव्य धार्मिक उल्लास के साथ भगवान श्री राम की विशेष पालकी यात्रा निकाली जाएगी।

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