नोएडा: सेक्टर-39 स्थित नोएडा जिला अस्पताल में लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के पांचवें फ्लोर पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड द...
नोएडा: सेक्टर-39 स्थित नोएडा जिला अस्पताल में लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के पांचवें फ्लोर पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड द्वारा सिरिंज में दवा भरने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ।
अस्पताल प्रबंधन ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी सुरक्षा गार्ड और संबंधित स्टाफ नर्स दोनों को नौकरी से निकाल दिया है। ये दोनों कर्मचारी आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से अस्पताल में तैनात किए गए थे।
घटना 14 अगस्त की रात की है, जब मेडिकल वार्ड में मरीजों की देखभाल के लिए स्टाफ नर्स रिचा कुमारी और सुरक्षा व्यवस्था के लिए गार्ड सुनील की ड्यूटी लगी थी।
💉 नर्सिंग स्टेशन पर बैठकर सिरिंज भरता दिखा गार्ड: सोशल मीडिया पर सीएम से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तक शिकायत
अस्पताल में हुई इस गंभीर लापरवाही का पूरा घटनाक्रम वीडियो में कैद हो गया:
गार्ड को दी गई थीं खाली सिरिंज: आरोप है कि स्टाफ नर्स ने गार्ड सुनील को मरीजों को इंजेक्शन लगाने के लिए कई खाली सिरिंज देकर जल्द से जल्द दवा भरने को कहा।
वीडियो में दिखा साक्ष्य: वीडियो में गार्ड नर्सिंग स्टेशन पर बैठकर सिरिंज में दवा भरता हुआ साफ नजर आ रहा है और पास में दवा भरी हुई कई सिरिंज रखी दिख रही हैं। बगल में मौजूद नर्स ने उसे ऐसा करने से मना नहीं किया।
उच्चाधिकारियों को टैग कर शिकायत: इस वीडियो को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, जिलाधिकारी और महानिदेशक स्वास्थ्य विभाग को टैग करते हुए कार्रवाई की मांग की गई।
कड़ी कार्रवाई: मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अशोक कुमार झा ने मामले की जांच के बाद दोनों को तुरंत प्रभाव से निष्कासित कर दिया और संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
⚠️ नोएडा जिला अस्पताल में पहले भी सामने आ चुके हैं कई बड़े विवाद
जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं से जुड़े मामले पहले भी सुर्खियों में रहे हैं:
"नोएडा जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रिश्वतखोरी के कई वीडियो पूर्व में भी वायरल हो चुके हैं। पिछले वर्ष मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के एवज में पैसे मांगने पर दो कर्मियों को हटाया गया था। इसके अतिरिक्त, पिछले तीन वर्षों में अस्पताल में अवैध टेंडरों की जांच जारी है, जिसमें तत्कालीन सीएमएस को दोषी पाया गया है। नियमों के विरुद्ध 17 नर्सों और लैब तकनीशियनों की अवैध भर्ती का मामला भी शासन स्तर पर जांच के दायरे में है।"

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