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NGT Order Noida Water Wastage: भूजल बर्बादी पर एनजीटी का कड़ा रुख, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 4 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

नोएडा/ग्रेटर नोएडा: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिना अनुमति धड़ल्ले से चल रहे अवैध वाहन धुलाई (कार वॉश) केंद्...


नोएडा/ग्रेटर नोएडा: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिना अनुमति धड़ल्ले से चल रहे अवैध वाहन धुलाई (कार वॉश) केंद्रों पर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है।

एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और राज्य के भूगर्भ जल विभाग को दोनों शहरों में संचालित अवैध वाहन धुलाई केंद्रों के संबंध में अगले चार हफ्तों के भीतर नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लगभग 1,000 अवैध वाहन धुलाई केंद्र हर महीने करीब 30 करोड़ लीटर भूजल बर्बाद कर रहे हैं।

💧 हर महीने 30 करोड़ लीटर पानी हो रहा बर्बाद: NGT ने अखबार की रिपोर्ट पर लिया स्वतः संज्ञान

एनजीटी ने एक समाचार पत्र की विस्तृत रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लिया है:

  • अवैध केंद्रों की भरमार: रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि दोनों शहरों में वाहनों की धुलाई करने वाले करीब 1,000 अवैध केंद्र चल रहे हैं।

  • भूजल का दोहन: ये अवैध केंद्र पीने योग्य और कीमती भूजल का व्यावसायिक इस्तेमाल कर हर महीने लगभग 30 करोड़ लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं।

📊 क्या कहती है सरकार की रिपोर्ट? केवल 14 इकाइयों के पास ही जरूरी मंजूरी

एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए:

  • कुल चिन्हित इकाइयां: उत्तर प्रदेश के भूगर्भ जल विभाग ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में गौतम बुद्ध नगर जिले में 193 वाहन धुलाई केंद्रों की पहचान किए जाने की बात कही है।

  • औद्योगिक व गैर-औद्योगिक क्षेत्र: इनमें से 55 केंद्र औद्योगिक क्षेत्रों में जबकि 138 गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैं।

⚖️ 23 इकाइयां पूरी तरह अवैध: 2-2 लाख रुपये का जुर्माना ठोका

एनजीटी ने विभागीय रिपोर्ट का विश्लेषण करते हुए बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित 55 में से केवल 14 इकाइयों के पास ही वैध अनुमति है:

  • लंबित आवेदन: 12 अन्य इकाइयों के अनुमति हेतु दिए गए आवेदन वर्तमान में लंबित हैं।

  • बिना अनुमति संचालन: 23 इकाइयां बिना किसी वैध अनुमति के संचालित होती पाई गईं, जिन्होंने कभी मंजूरी के लिए आवेदन तक नहीं किया था।

  • भारी जुर्माना: गौतमबुद्ध नगर जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद ने इन 23 अवैध इकाइयों पर 'उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम' के तहत दो-दो लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाने का फैसला किया है।

⚡ आंकड़ों में मिला भारी अंतर: 100 इकाइयों की बिजली काटी गई, अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को

अधिकरण ने गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित 138 इकाइयों के संबंध में भी कड़े सवाल उठाए:

  • बिजली कनेक्शन काटे: यूपीपीसीबी के वकील ने पीठ को बताया कि इनमें से 100 अवैध इकाइयों के बिजली कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके हैं।

  • आंकड़ों में असमानता: हालांकि, एनजीटी ने प्राधिकारियों द्वारा पेश किए गए आंकड़ों में अंतर पाया। यूपीपीसीबी के वकील ने स्वीकार किया कि 11 इकाइयों के आंकड़ों में विसंगति है।

  • कुल संख्या में अंतर: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऐसी कुल 204 इकाइयां दर्ज हैं, जबकि शासन द्वारा केवल 193 इकाइयों के संबंध में ही ब्योरा पेश किया गया।

  • अगली सुनवाई: एनजीटी ने भूगर्भ जल विभाग और यूपीपीसीबी को चार हफ्ते के भीतर दुरुस्त अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की गई है।







 

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