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Kiran Bedi Blames China for Nepal Disaster: हिमालयी क्षेत्र में निर्माण कार्य और पर्माफ्रॉस्ट पिघलने पर किरण बेदी ने जताई चिंता

मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई है और आपदा के बाद तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी है...

मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई है और आपदा के बाद तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी है। पड़ोसी देश में आई इस विपदा को लेकर देश की पहली महिला IPS अधिकारी और पुडुचेरी के पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी ने बेहद चिंता जताई है और आने वाले वक्त में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अभी से तैयारियों में जुट जाने के लिए कहा है। इस तबाही के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि चीन की जल्दबाजी की भारी कीमत नेपाल को चुकाना पड़ रही है।

⛰️ 2. 'चीन की जल्दबाजी और पर्माफ्रॉस्ट पिघलने से हुआ बड़ा नुकसान'

किरण बेदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि 'हिमालयी इलाके में रक्षा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की चीन की जल्दबाजी की भारी कीमत नेपाल को चुकानी पड़ी है। चीन ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि पर्माफ्रॉस्ट (जमी हुई मिट्टी) उसके रोड प्रोजेक्ट, रेलवे प्रोजेक्ट, हाईवे, टनल, माइनिंग और एयरपोर्ट के लिए मजबूत नींव नहीं बन सकती।' आगे उन्होंने लिखा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना तय है और इससे वहां बनी संरचनाओं की नींव का ढहना भी तय है।

🛑 3. 'जो शहरों की प्लानिंग ठीक से नहीं कर पाते, वो हिमालय की क्या करेंगे'

प्रकृति को अकेला छोड़ देने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि जो अफसर शहरों की प्लानिंग ठीक से नहीं कर पाते, वो हिमालय की कैसे कर लेंगे। बेदी ने लिखा, 'प्रकृति को खुद ठीक होने के लिए छोड़ देना चाहिए। जब नौकरशाह शहरों की प्लानिंग ठीक से नहीं कर पाते, तो आप उनसे हिमालय जैसी जटिल संरचनाओं के लिए प्लानिंग की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?' इसके साथ ही उन्होंने हिमालय के आसपास मौजूद सभी देशों को एक ग्रुप बनाने की सलाह दी और उसके साथ छेड़छाड़ बंद करने के लिए कहा।

⚠️ 4. 'आने वाले संकट हमारी जिंदगी का हिस्सा बन सकते हैं, रहना होगा तैयार'

इससे पहले शेयर की गई पोस्ट में पूर्व IPS अधिकारी ने ग्लोबल वार्मिंग और ग्लेशियरों के टूटने पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन अब ऐसा काम नहीं हो सकता जो किसी घटना के बाद कभी-कभार किया जाए, बल्कि इसे साल भर बनी रहने वाली तैयारी की संस्कृति बनाना होगा। शायद आने वाले सालों में खराब मौसम और अचानक आने वाले संकट हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाएं। अंत में उन्होंने नेपाल की घटना से सबक लेते हुए तैयार और सतर्क रहने की अपील की है।







 

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