एक ट्रैफिक का दरिया है और जूझ के जाना है… राखी पर दिल्ली-NCR की सड़कों का कुछ ऐसा ही हाल रहा. दिल्ली कैंट में रहने वाले दीपक को लक्ष्मीनगर म...
एक ट्रैफिक का दरिया है और जूझ के जाना है… राखी पर दिल्ली-NCR की सड़कों का कुछ ऐसा ही हाल रहा. दिल्ली कैंट में रहने वाले दीपक को लक्ष्मीनगर में अपनी बहन के घर राखी बंधवाने पहुंचना था. बात नाश्ते पर मिलने की हुई थी, लेकिन ट्रैफिक ने पहुंचा दिया लंच और ब्रंच के बीच. बारिश के दिनों में गुरुग्राम को वर्क फ्रॉम होम मिल सकता है, लेकिन त्योहार पर छुट्टी हो या न हो, रिश्तों से छुट्टी नहीं मिलती. बहन के हाथ से राखी बंधवानी है तो सड़क पर निकलना ही है… चाहे स्टेयरिंग संभालते-संभालते हाथ दुख जाएं. गुरुवार-शुक्रवार को दिल्ली-NCR में हजारों लोगों ने त्योहार मनाने के लिए सड़कों पर लंबा ट्रैफिक झेला.
🚦 2. क्या त्योहार पर ट्रैफिक बढ़ना सामान्य है या व्यवस्था में है कमी?
सवाल सिर्फ यह नहीं कि त्योहार पर ट्रैफिक बढ़ना स्वाभाविक है या नहीं, सवाल यह भी है कि क्या इतने बड़े ट्रैफिक वॉल्यूम को मैनेज करने की हमारी व्यवस्था पर्याप्त है? दिल्ली के पूर्व ज्वाइंट कमिश्नर ट्रैफिक सत्येंद्र गर्ग कहते हैं कि त्योहार के दिन ट्रैफिक बढ़ना स्वाभाविक है क्योंकि हर व्यक्ति किसी न किसी का भाई, बहन या रिश्तेदार है और ऐसे मौकों पर बड़ी संख्या में लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं. फर्क यह है कि अब शहर में वाहनों की संख्या और ट्रैवल का दायरा दोनों बढ़े हैं. दिल्ली अब भी बड़ी हद तक निजी वाहनों पर निर्भर है और सड़क की क्षमता सीमित है.
👮♂️ 3. पुलिस की तैनाती और ट्रैफिक मैनेजमेंट की चुनौतियां
पूर्व एडिशनल सीपी दिनेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि त्योहारों पर सामान्य ट्रैफिक रूट के अलावा बाजारों, प्रमुख सड़कों और बड़े कॉरिडोर पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की जाती है. बारिश की स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए रेनकोट और छाते जैसी व्यवस्थाएं भी की जाती हैं. यानी त्योहारों के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट की तैयारी होती है, लेकिन जब एक साथ कई इलाकों में वाहनों का दबाव बढ़ता है तो छोटी-सी गड़बड़ी भी लंबा जाम पैदा कर सकती है. खराब ट्रैफिक सिग्नल या सड़क पर किसी वाहन का रुक जाना पूरे रूट को प्रभावित करता है.
🚌 4. पब्लिक ट्रांसपोर्ट और नागरिकों की जिम्मेदारी से ही निकलेगा रास्ता
रोड ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट नलिन के मुताबिक, लंबे समय में ट्रैफिक की समस्या का समाधान सिर्फ सड़कें बढ़ाने से नहीं होगा. पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर और ज्यादा आकर्षक बनाना जरूरी है, लेकिन जिम्मेदारी सिर्फ सिस्टम की भी नहीं है. गलत दिशा में गाड़ी चलाना, रॉन्ग साइड जाना, अचानक ओवरटेक करना या नियम तोड़ना भी जाम को बढ़ाता है. इसलिए ट्रैफिक मैनेजमेंट में नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही जरूरी है. अंततः तमाम मुश्किलों के बावजूद लोग अपने रिश्तों तक पहुंचने की जिद के साथ आगे बढ़ते नजर आए.

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