ईरान की राष्ट्रीय मुद्रा ‘रियाल’ की विनिमय दर में भारी गिरावट आई है, और यह गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस आर्थिक तबाही का...
ईरान की राष्ट्रीय मुद्रा ‘रियाल’ की विनिमय दर में भारी गिरावट आई है, और यह गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस आर्थिक तबाही का सबसे बड़ा कारण वॉशिंगटन द्वारा तेहरान की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करने के लिए लगाए गए अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध हैं। मौजूदा समय में फ्री मार्केट में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 20 लाख रियाल से भी ज्यादा हो चुकी है। भारतीय रुपये के मुकाबले डॉलर का भाव लगभग 95 रुपए होने के कारण, महज 100 रुपए की कीमत अब लगभग 21 लाख ईरानी रियाल के बराबर बैठती है।
💣 युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की दोहरी मार: आसमान छू रही हैं जरूरी चीजों की कीमतें
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही अपने विवादास्पद न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर दशकों से झेल रहे अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण गहरी मुश्किलों में थी। अब मौजूदा ईरान-इजराइल युद्ध ने रियाल को और भी गहरे संकट में धकेल दिया है, जिससे देश में महंगाई बेकाबू हो गई है और आम नागरिकों का घरेलू बजट पूरी तरह चरमरा गया है। आम लोगों की क्रय शक्ति (परचेजिंग पावर) में कितनी तेजी से गिरावट आई है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध से पहले 20 लाख रियाल में जितना सामान आता था, आज महंगाई के कारण उससे आधा ही मिल पा रहा है।
🍅 100 रुपए (21 लाख रियाल) में अब क्या-क्या खरीद सकते हैं ईरानी नागरिक?
अल जजीरा की तेहरान में कीमतों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, 100 रुपए या लगभग 21 लाख रियाल में अब एक औसत नागरिक बमुश्किल 2 किलो टमाटर, करीब 25 ग्राम चिकन और आधे लीटर से भी कम कुकिंग ऑयल खरीद पा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, टमाटर की औसत कीमत में 71%, चिकन में 74% और कुकिंग ऑयल में 177% का जबरदस्त उछाल आया है। इस महंगाई का सबसे भयानक असर स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं पर पड़ा है, जहां इंसुलिन की कीमत में 642%, पैरासिटामोल में 93% और सरकार द्वारा सब्सिडी प्राप्त बेबी फॉर्मूला की कीमत में 95% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
💸 लाखों रियाल सैलरी पर भारी महंगाई: महीने के आखिर तक गुजारा करना हुआ मुश्किल
मुद्रा का मूल्य घटने के बावजूद सरकार और अधिकारी उस अनुपात में मजदूरी या वेतन बढ़ाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। ईरान सरकार द्वारा तय न्यूनतम मासिक मजदूरी वर्तमान में 16.6 करोड़ (166 मिलियन) रियाल है, जो मौजूदा एक्सचेंज रेट के हिसाब से लगभग 82 डॉलर यानी 7,820 रुपए बनती है। सरकारी सहायता और अन्य फायदों को भी जोड़ लिया जाए तो यह रकम 220 मिलियन रियाल यानी लगभग 108 डॉलर (10,298 रुपए) तक बैठती है। तेहरान की रहने वाली 35 वर्षीय अफसानेह ने बताया कि युद्ध से पहले लोग भविष्य की योजनाएं बनाते थे, लेकिन अब हर परिवार की एकमात्र चिंता यह है कि वे अपनी सीमित आय से महीने के अंत तक अपने परिवार का पेट कैसे पालें।

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