केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में टोक्यो में बड़ा बयान देते हुए जानकारी दी है कि जापानी कंपनियों ने मात्र 10 महीनों...
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में टोक्यो में बड़ा बयान देते हुए जानकारी दी है कि जापानी कंपनियों ने मात्र 10 महीनों के भीतर भारत में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। यह शानदार निवेश टोक्यो द्वारा वर्ष 2025 में किए गए उस वादे का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा पूरा करता है, जिसके तहत अगले 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 7 लाख करोड़ रुपये) के निवेश का लक्ष्य रखा गया था। टोक्यो में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने पूरा भरोसा जताया कि मौजूदा तेज रफ्तार को देखते हुए यह विशाल लक्ष्य अपने तय 10 साल के समय से काफी पहले, यानी महज 3 से 4 साल के भीतर ही पूरा हो जाएगा।
🤝 भारत में जापान की मौजूदगी को दोगुना करने का लक्ष्य: पारंपरिक सेक्टर से आगे बढ़ने का आह्वान
मंत्री पीयूष गोयल ने याद दिलाया कि पिछली बार जापान ने 10 साल में 5 ट्रिलियन येन निवेश करने का लक्ष्य रखा था, जिसे उसने महज 5 साल में ही हासिल कर लिया था। इसी शानदार प्रगति को देखते हुए 2025 में इस लक्ष्य को दोगुना करने का निर्णय लिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन भारत में सक्रिय जापानी कंपनियों की संख्या को 1,500 से बढ़ाकर 3,000 तक पहुंचाने का है। गोयल ने जापानी निवेशकों से अपील की कि वे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंश्योरेंस और पेंशन फंड्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी अपने कारोबार का विस्तार करें, जिससे भारत के विशाल बाजार और जापान की सटीक इंजीनियरिंग (प्रिसिजन इंजीनियरिंग) का बेहतरीन तालमेल बैठ सके।
🚀 'डीप टेक कैपिटल कॉरिडोर' और 'टू-वे इनोवेशन ब्रिज' का प्रस्ताव
टोक्यो में 'इंडिया-जापान स्टार्टअप राउंडटेबल' को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने शुरुआती दौर की रिसर्च, डीप-टेक इनोवेशन और कमर्शियलाइजेशन के लिए 'पेशेंट कैपिटल' (दीर्घकालिक निवेश) जुटाने हेतु 'डीप टेक कैपिटल कॉरिडोर' स्थापित करने का शानदार प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही दोनों देशों की यूनिवर्सिटीज, इनक्यूबेटर्स, आरएंडडी संस्थानों और प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ने के लिए 'टू-वे इनोवेशन ब्रिज' का भी सुझाव दिया गया। उन्होंने भारतीय फाउंडर्स, जापानी कॉरपोरेट्स और वेंचर फंड्स के बीच आपसी संवाद को आसान बनाने के लिए एक 'जॉइंट स्टार्टअप पिचिंग प्लेटफॉर्म' बनाने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया।
📈 दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम: भारत में तेजी से बढ़ रहे यूनिकॉर्न
इस कार्यक्रम में जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मल्लिक ने साझा किया कि 'इंडिया-जापान पिचिंग सीरीज' के माध्यम से अब तक लगभग 65 भारतीय स्टार्टअप्स को करीब 100 जापानी कंपनियों से जोड़ा जा चुका है, जिससे 30 से अधिक व्यावसायिक साझेदारियां (बिजनेस टाई-अप) वजूद में आई हैं। भारत सरकार डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिसके तहत लगभग 1 बिलियन डॉलर के दूसरे 'फंड ऑफ फंड्स' की शुरुआत की गई है। मंत्री ने बताया कि 1.5 अरब डॉलर के पहले स्टार्टअप फंड ने लगभग 10 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित किया है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां 'स्टार्टअप इंडिया' की शुरुआत के पिछले 10 वर्षों में स्टार्टअप्स की संख्या 510 से बढ़कर 2.5 लाख तक पहुंच गई है और देश में 130 से अधिक यूनिकॉर्न खड़े हो चुके हैं।

कोई टिप्पणी नहीं