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High Court Dr Sanchari Ghosh Case: गलत जानकारी देकर एंट्रेंस टेस्ट देने वाली डॉक्टर की उम्मीदवारी रद्द, दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त फैसला

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि कॉम्पिटिटिव और प्रोफेशनल परीक्षा सिस्टम की विश्वसनी...

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि कॉम्पिटिटिव और प्रोफेशनल परीक्षा सिस्टम की विश्वसनीयता और पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी उम्मीदवारों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं, दोनों की होती है।

जस्टिस जसमीत सिंह ने 'नेशनल बोर्ड कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी फेलोशिप' के लिए एक डॉक्टर की उम्मीदवारी रद्द करने के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने नियम उल्लंघन करने वाली डॉक्टर और लापरवाही बरतने वाली संस्था दोनों पर जुर्माना लगाया है।

📜 गलत जानकारी देकर ली फेलोशिप में एंट्री: तय कट-ऑफ तारीख तक पूरी नहीं थी योग्यता

मामले की पूरी पृष्ठभूमि:

  • योग्यता की शर्त: 'नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज' (NBEMS) के फेलोशिप एंट्रेंस टेस्ट-2024 के नियमों के मुताबिक उम्मीदवारों को 31 दिसंबर 2024 तक जरूरी पोस्टग्रेजुएट क्वालिफिकेशन हासिल करनी थी।

  • गलत जानकारी दर्ज की: याचिकाकर्ता डॉ. संचारी घोष ने अपनी एप्लीकेशन, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और कन्फर्मेशन में तीन बार गलत जानकारी देकर 31 दिसंबर 2024 तक पास होने का दावा किया।

  • वास्तविक स्थिति: उनकी कार्डियोलॉजी की फाइनल परीक्षा जनवरी 2025 में हुई थी और प्रोविजनल पास सर्टिफिकेट मई 2025 में जारी हुआ था। इसके बावजूद उन्होंने परीक्षा दी, 14वीं रैंक हासिल की और बेंगलुरु के नारायण हृदयालय में फेलोशिप जॉइन कर ली।

❌ 'नौ महीने की ट्रेनिंग से पक्का अधिकार नहीं बनता': कोविड का बहाना भी कोर्ट ने किया खारिज

अदालत का कड़ा अवलोकन:

"दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉक्टर की इस दलील को खारिज कर दिया कि कोविड-19 की वजह से हुई देरी के कारण उन्हें छूट मिलनी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि 9 महीने की ट्रेनिंग पूरी कर लेने से अयोग्यता छुप नहीं जाती और नियमों के तहत गलत जानकारी देने पर किसी भी समय एडमिशन रद्द किया जा सकता है।"

🏛️ डॉक्टर के साथ NBEMS पर भी लगा जुर्माना: 'एक-दूसरे को हल्के में नहीं ले सकते'

हाई कोर्ट का फैसला और वित्तीय जुर्माना:

  • NBEMS की लापरवाही पर खिंचाई: कोर्ट ने NBEMS की भी कड़ी आलोचना की कि जब डॉक्टर ने कोर्स की शुरुआत अप्रैल 2022 बताई थी, तो संस्था ने 9 महीने तक इस अयोग्यता को क्यों नहीं पकड़ा और उन्हें परीक्षा व ट्रेनिंग की अनुमति दी।

  • जुर्माने की राशि: कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए गलत जानकारी देने पर डॉक्टर संचारी घोष पर ₹1,000 और लापरवाही बरतने के लिए NBEMS पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया।

  • सिस्टम की ईमानदारी: जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि भारत में मेडिकल और कॉम्पिटिटिव परीक्षाएं लाखों छात्रों के सालों के त्याग से जुड़ी होती हैं। यदि मेरिट तय करने की प्रक्रिया से समझौता किया जाएगा तो मेरिट का अर्थ ही खत्म हो जाएगा।







 

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