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Delhi High Court On Live In Couple Security: 'जाति और धर्म से ऊपर है पसंद का अधिकार', दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रेमी जोड़े को दी पुलिस सुरक्षा

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि दो बालिगों का आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना कानू...

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि दो बालिगों का आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना कानूनन शादी जैसा ही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न तो माता-पिता और न ही कोई दोस्त या रिश्तेदार उनकी पसंद में दखल दे सकते हैं और न ही उनकी जिंदगी या आजादी को खतरे में डाल सकते हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौरभ बनर्जी ने लड़की के परिजनों की ओर से मिल रही धमकियों को गंभीरता से लिया और संबंधित प्रेमी जोड़े को तुरंत पुलिस सुरक्षा (Police Protection) मुहैया कराने के निर्देश जारी किए।

🆔 'मौलिक अधिकारों को सीमित करना पहचान छीनने जैसा': जाति-धर्म से परे है चुनने का अधिकार

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी:

  • संवैधानिक अधिकार: कोर्ट ने 13 अगस्त को जारी आदेश में कहा कि बालिगों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों को जाति, धर्म, रंग, पंथ या पुरानी सामाजिक मान्यताओं से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।

  • व्यक्तिगत पहचान: जज ने टिप्पणी की कि तथाकथित 'सामाजिक सोच' और 'पुरानी परंपराओं' के नाम पर संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों को सीमित करना किसी भी व्यक्ति से उसकी निजी पहचान छीनने जैसा है।

🚫 माता-पिता या रिश्तेदारों को दखलअंदाजी का हक नहीं: कोर्ट ने कहा- कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता

अधिकार और स्वतंत्रता पर हाई कोर्ट का रुख:

"अदालत ने कहा कि जब याचिकाकर्ताओं ने अपनी मर्जी, पूरी जिम्मेदारी और आपसी सहमति से एक-साथ रहने का निर्णय लिया है, तो किसी को भी—चाहे वे उनके माता-पिता हों या रिश्तेदार—उनकी जिंदगी में रुकावट डालने या उनकी सुरक्षा व आजादी को खतरे में डालने का बिल्कुल भी अधिकार नहीं है।"

👫 30 साल के जोड़े ने मांगी थी सुरक्षा: परिजनों से मिल रही थीं लगातार धमकियां

याचिकाकर्ताओं का पक्ष और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ:

  • परिजनों का विरोध: याचिकाकर्ता जोड़े (जिनकी उम्र करीब 30 वर्ष है) ने कोर्ट को बताया कि वे पिछले कुछ समय से साथ रह रहे हैं और भविष्य में शादी करना चाहते हैं। हालांकि, लड़की के पिता और भाई इस रिश्ते से नाराज हैं और लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं।

  • पुलिस की निष्क्रियता: जोड़े ने स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

  • सुप्रीम कोर्ट की नजीर: हाई कोर्ट ने दोहराया कि देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने भी यह व्यवस्था दी है कि शादी किए बिना भी दो बालिगों को अपनी मर्जी से लिव-इन में रहने का पूरा संवैधानिक अधिकार है।







 

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