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Medical Marvel Faridabad Fortis: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स के डॉक्टरों ने किया चमत्कार, 45 मिनट की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से 4000 से ज्यादा पथरी निकालीं

  दिल्ली से सटे फरीदाबाद स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। ड...

 


दिल्ली से सटे फरीदाबाद स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डॉक्टरों ने 41 वर्षीय मरीज के गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) से 4,000 से अधिक पथरियां (गॉलस्टोन्स) निकालकर उन्हें नया जीवन दिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इतनी विशाल संख्या में पथरियां निकाले जाने का यह क्षेत्र का बेहद दुर्लभ मामला है।

मरीज अत्यधिक मोटापे (46 BMI) के साथ-साथ ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया, टाइप-2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन और एक्यूट किडनी इंजरी जैसी गंभीर समस्याओं से पीड़ित था। किडनी की स्थिति खराब होने के कारण उसे डायलिसिस की भी आवश्यकता पड़ रही थी।

🩺 एक सप्ताह से पेट के तेज दर्द से परेशान था मरीज: जांच में मिले हजारों माइक्रोस्कोपिक गॉलस्टोन्स

चिकित्सकों के अनुसार, मरीज पिछले एक सप्ताह से पेट में असहनीय तेज दर्द, उल्टी और गंभीर अपच की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था:

  • जांच रिपोर्ट में खुलासा: सोनोग्राफी व अन्य जांचों में गॉल ब्लैडर में गंभीर सूजन, हजारों की संख्या में सूक्ष्म गॉलस्टोन्स और गाढ़ा बाइलरी स्लज देखा गया।

  • संक्रमण का खतरा: पथरियों की इतनी अधिक संख्या के कारण गॉल ब्लैडर के फटने, गंभीर इंफेक्शन होने और बाइल डक्ट में रुकावट जैसी जानलेवा जटिलताओं का बड़ा जोखिम बना हुआ था।

⏱️ 45 मिनट में पूरी हुई जटिल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी: अगले ही दिन मिली डिस्चार्ज

अस्पताल के सीनियर डायरेक्टर (जीआई, मिनिमल एक्सेस एंड बेरियाट्रिक सर्जरी) डॉ. बी.डी. पाठक के नेतृत्व में बहुविषयक (Multidisciplinary) टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया:

  • त्वरित प्रक्रिया: मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देकर मिनिमली इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक तकनीक से मात्र 45 मिनट के भीतर पूरी सर्जरी संपन्न की गई।

  • टीम वर्क: सर्जिकल टीम के साथ नेफ्रोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन के विशेषज्ञों ने मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने में अहम योगदान दिया।

  • शीघ्र रिकवरी: सफल ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज को दर्द से राहत के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह सामान्य रूप से चलने-फिरने लगा।

👨‍⚕️ सर्जरी की चुनौतियों पर क्या बोले विशेषज्ञ?

डॉक्टरों ने इस सफल ऑपरेशन को मेडिकल टीम वर्क की बड़ी जीत बताया है:

"46 बीएमआई और एक्यूट किडनी फेलियर से जूझ रहे हाई-रिस्क मरीज का ऑपरेशन करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। मिनिमल एक्सेस सर्जरी के उपयोग से सर्जिकल ट्रॉमा और एनेस्थीसिया का समय कम हुआ, जिससे जटिलताओं का खतरा टल गया।"

"यह मामला अस्पताल की सर्जिकल, नेफ्रोलॉजी, क्रिटिकल केयर और एनेस्थीसिया टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय का प्रतीक है। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों में त्वरित निर्णय और विशेषज्ञों का तालमेल ही सफलता की कुंजी है।"







 

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