नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति (शराब नीति) मामले में पूर्व मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा पूर्व उपमुख्यमं...
नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति (शराब नीति) मामले में पूर्व मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सीबीआई (CBI) की याचिका के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में आवेदन दायर किया है।
गौरतलब है कि निचली अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) ने आबकारी मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त (बरी) कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) दायर की थी, जिस पर अब आप नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है।
केजरीवाल और सिसोदिया ने सीबीआई की इस कार्रवाई की मंशा और जल्दबाजी पर सवाल उठाया है। उनका तर्क है कि निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के महज चार घंटे के भीतर ही सीबीआई ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर दी। यह एजेंसी की असाधारण और गैर-गंभीर जल्दबाजी को दर्शाता है।
🔍 "बिना फैसला समझे दायर की गई याचिका": आप नेताओं ने सीबीआई पर लगाया मुकदमे में फंसाए रखने का आरोप
उच्च न्यायालय में दायर आवेदन में केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से कहा गया है:
साक्ष्यों का अभाव: निचली अदालत के विस्तृत फैसले को पूरी तरह समझे बिना सीबीआई का यह कदम साबित करता है कि एजेंसी किसी भी तरह नेताओं को मुकदमे में उलझाए रखना चाहती है।
प्रथमदृष्ट्या कोई केस नहीं: राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट माना था कि सीबीआई ऐसा कोई प्राथमिक साक्ष्य या तथ्य पेश नहीं कर सकी जो आबकारी नीति में किसी घोटाले को प्रमाणित करता हो।
शुरुआती स्तर पर ही खारिज: यह मामला आरोप तय करने (Charge Framing) के शुरुआती चरण में ही खारिज हो गया और इसमें गवाहों के बयान दर्ज करने तक की नौबत नहीं आई।
दोनों वरिष्ठ नेताओं ने उच्च न्यायालय से गुजारिश की है कि समय की बर्बादी को रोकते हुए सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका को तुरंत खारिज किया जाए। इस मामले पर हाईकोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है।
🏛️ 27 फरवरी को निचली अदालत ने 23 आरोपियों को किया था बरी: जानिए क्या है पूरा मामला
23 आरोपी हुए थे आरोपमुक्त: राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और बीआरएस नेता के. कविता सहित सभी 23 आरोपियों को मामले से बरी कर दिया था।
सीबीआई का पक्ष: सीबीआई ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि निचली अदालत ने जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया और साक्ष्यों पर गहराई से विचार नहीं किया।
मामले की पृष्ठभूमि: दिल्ली सरकार द्वारा वर्ष 2021 में नई आबकारी नीति लागू की गई थी। इसके क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद इसे वापस ले लिया गया था। इसके बाद दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।

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