नई दिल्ली: दिल्ली में अब 500 से अधिक सरकारी सेवाएं आम जनता को तय समय-सीमा के भीतर मिलेंगी। यदि सेवाओं के निष्पादन में अनावश्यक देरी होती है...
नई दिल्ली: दिल्ली में अब 500 से अधिक सरकारी सेवाएं आम जनता को तय समय-सीमा के भीतर मिलेंगी। यदि सेवाओं के निष्पादन में अनावश्यक देरी होती है, तो न केवल संबंधित अधिकारी पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के पास ऑटो-एस्केलेशन सिस्टम के जरिए शिकायत भी अपने आप पहुंच जाएगी।
इस व्यवस्था को कानूनी रूप देने के लिए दिल्ली विधानसभा के सत्र में पेश किया गया 'सेवा गारंटी संशोधन विधेयक' पास हो गया है। यह नया विधेयक वर्ष 2011 के पुराने कानून का स्थान लेगा। इसके अतिरिक्त, ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी को वापस लेने और वर्ष 2025 तक बनी झुग्गियों के पुनर्वास से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण बिल भी विधानसभा में पास कर दिए गए हैं।
📱 घर बैठे ट्रैक कर सकेंगे अपने आवेदन की स्थिति: ऑटो-एस्केलेशन सिस्टम से तय होगी अफसरों की जवाबदेही
आईटी मंत्री ने डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था का खाका पेश किया:
यूनिक ट्रैकिंग आईडी: दिल्ली के आईटी मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि नागरिक सेवाओं में आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए प्रत्येक आवेदन को एक 'यूनिक नंबर' दिया जाएगा। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपने आवेदन का स्टेटस ऑनलाइन देख सकेंगे।
सीधा वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगी शिकायत: यदि निर्धारित समय में सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो सिस्टम के जरिए आवेदन स्वतः ही ऑटो-एस्केलेशन मॉडल पर वरिष्ठ अधिकारी के पास समीक्षा के लिए ट्रांसफर हो जाएगा।
⚠️ लापरवाही बरती तो 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लगेगा 5,000 रुपये तक का जुर्माना
लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी व्यवस्था की गई है:
पेनल्टी का प्रावधान: नए कानून के तहत बिना किसी उचित कारण के सेवा में देरी करने या गलत तरीके से आवेदन खारिज करने वाले अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी। समय सीमा में काम न करने पर संबंधित अधिकारी पर 250 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपये होगी।
गलत निरस्तीकरण पर कार्रवाई: आवेदन को अनुचित तरीके से निरस्त करने पर भी 250 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, कार्रवाई से पहले अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
कानून का दायरा: यह कानून पूरी दिल्ली में लागू होगा। इसके दायरे में दिल्ली सरकार के नियमित विभागों के अलावा दिल्ली नगर निगम (MCD), एनडीएमसी (NDMC), दिल्ली छावनी परिषद (Delhi Cantt), दिल्ली जल बोर्ड और डीडीए (DDA) जैसे स्थानीय निकाय व संस्थाएं शामिल होंगी।
🏨 ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी वापस ली गई: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद सरकार का बड़ा फैसला
पर्यटन और सुरक्षा के नियमों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत बदलाव:
नीति वापस लेने की वजह: दिल्ली विधानसभा में ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी को वापस लेने से संबंधित संशोधन बिल भी पास कर दिया गया है। हाल ही में मालवीय नगर में हुए अग्निकांड में सुरक्षा मानकों की बड़ी खामियां सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
वैध संचालकों पर असर नहीं: सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों का पूर्ण पालन करके चल रही वैध जगहों पर इस फैसले का विपरीत असर नहीं पड़ेगा। जल्द ही इसकी जगह एक बेहतर और सुरक्षित नई नीति लागू की जाएगी।
🏠 2025 तक बनी सभी झुग्गियों को मिलेगा पुनर्वास का अधिकार: कट-ऑफ तारीख में हुआ संशोधन
राजधानी की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के निवासियों के लिए ऐतिहासिक घोषणा:
कट-ऑफ डेट में बदलाव: दिल्ली में वर्ष 2025 तक बनी सभी झुग्गियों के निवासियों का पुनर्वास सुनिश्चित करने वाला संशोधन विधेयक भी विधानसभा में पास हो गया है।
पुनर्वास की गारंटी: इसके तहत दिल्ली में 2025 से पहले बनी सभी झुग्गियों को हटाए जाने की स्थिति में रहने वाले परिवारों के लिए सरकार पक्के मकान या पुनर्वास की वैकल्पिक व्यवस्था करेगी। इससे पहले केवल वर्ष 2015 तक बनी झुग्गियों को ही इस योजना के दायरे में रखा गया था।

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