दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) वाहन चलाने वाले आम लोगों और कमर्शियल चालकों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने ...
दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) वाहन चलाने वाले आम लोगों और कमर्शियल चालकों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने सीएनजी की कीमत में 3.89 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है, और ये नए दाम शनिवार से पूरे क्षेत्र में लागू हो गए हैं। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 86.98 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। खास बात यह है कि इस साल यह पांचवां मौका है जब आईजीएल ने सीएनजी के दामों में इजाफा किया है। इससे पहले केवल मई के महीने में ही चार अलग-अलग चरणों में सीएनजी की कीमतों में कुल 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके लंबे अंतराल के बाद अब एक बार फिर दाम बढ़ाए गए हैं।
🌍 पश्चिम एशिया में तनाव और एलएनजी की महंगी कीमतें बनीं मुख्य वजह, विभिन्न शहरों में नए रेट
कंपनी ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे का कारण बताते हुए स्पष्ट किया है कि सीएनजी के उत्पादन में उपयोग होने वाली गैस का एक बड़ा हिस्सा आयातित एलएनजी (LNG) से पूरा होता है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी के दाम काफी बढ़ जाने के कारण गैस उत्पादन की लागत में भारी इजाफा हुआ है, जिसके चलते कंपनी को यह कदम उठाना पड़ा है। इस संशोधन के बाद नोएडा और गाजियाबाद में सीएनजी अब 95.59 रुपये प्रति किलो, मेरठ में 95.47 रुपये और गुरुग्राम में 92.01 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है। राज्यों में वैट (VAT) की दरों में अंतर होने के कारण अलग-अलग शहरों में सीएनजी की कीमतों में यह भिन्नता देखने को मिलती है।
📈 परिवहन लागत बढ़ने से आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर, सब्जियां और अन्य जरूरी चीजें हो सकती हैं महंगी
सीएनजी के दाम बढ़ने का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर में चलने वाले ऑटो, टैक्सी, कैब और माल ढुलाई करने वाले कमर्शियल वाहनों पर पड़ना तय है। इसके कारण आने वाले दिनों में यात्रियों का किराया और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, माल ढोने वाले वाहनों के महंगे होने से दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और अन्य दैनिक उपयोग का राशन भी महंगा हो सकता है। हॉर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील व्यापार मार्गों पर दबाव के चलते ऊर्जा बाजार में आई इस तेजी ने आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी और बजट पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।

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