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Sonam Wangchuk Fast Ended: जेपी नड्डा ने जूस पिलाकर खत्म कराया सोनम वांगचुक का अनशन, जानें किन शर्तों पर बनी बात

 26 दिनों तक अनिश्चितकालीन अनशन करने के बाद सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अब अन्न और जल स्वीकार कर लिया है। केंद्रीय मंत्र...



 26 दिनों तक अनिश्चितकालीन अनशन करने के बाद सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अब अन्न और जल स्वीकार कर लिया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में पहुंचकर वांगचुक को जूस पिलाकर उनकी भूख हड़ताल खत्म कराई।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पहले ही छोड़ चुके वांगचुक की तीन अन्य शर्तों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इनमें सबसे प्रमुख शर्त कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों व युवा प्रदर्शनकारियों को कानूनी ऐक्शन से बचाने की थी, जिसे सरकार ने मान तो लिया है, लेकिन उसमें इस्तेमाल किए गए एक शब्द ने 'लक्ष्मण रेखा' खींच दी है। इससे साफ हो गया है कि उपद्रव और हिंसा करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

📜 वांगचुक ने सरकार के सामने रखी थीं ये 3 प्रमुख शर्तें

सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के बाद एक वीडियो मैसेज शेयर करके बताया कि उनके और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच दो दिनों तक गहन बातचीत हुई। वांगचुक ने सरकार के सामने तीन शर्तें रखी थीं, जिनमें से दो पर सरकार विचार करने को तैयार हो गई:

  • नीट पेपर लीक से पीड़ित परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक के बाद तनाव में आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा।

  • संसद में चर्चा: संसद सत्र के दौरान शिक्षा व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के विषय पर विचार।

  • तीसरी मांग: CJP के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करना।

वांगचुक ने 22 जुलाई को जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के नाम जो लेटर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया था, उसमें मांग की थी कि, "सरकार यह भरोसा दे कि किसी भी युवा प्रदर्शनकारी पर दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। उनका एकमात्र 'दोष' अच्छे और जवाबदेह एजुकेशन सिस्टम के लिए आवाज उठाना है।"

⚖️ सरकार ने 'शांतिपूर्वक' शब्द जोड़कर खींची लक्ष्मण रेखा

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में वांगचुक को बताया गया कि किसी भी ऐसे प्रदर्शनकारी पर केस दर्ज नहीं किया जाएगा जो 'शांतिपूर्वक' इस आंदोलन में शामिल था।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार का बयान वांगचुक के सामने पढ़ते हुए कहा, "सरकार उन लोगों के खिलाफ केस दर्ज न करने को लेकर पूरी तरह सकारात्मक है, जिन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और 20 जुलाई के संसद मार्च में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया।"

🚔 हिंसा करने वालों को नहीं मिलेगी राहत, एफआईआर और पासपोर्ट रद्द करने की तैयारी

सरकार ने अपने इस बयान से यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जिन लोगों ने प्रदर्शन के दौरान कानून को अपने हाथ में लिया, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और रेल भवन जैसे संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मियों पर पथराव करने वाले उपद्रवियों पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

दिल्ली पुलिस हिंसा के मामले में करीब 11 एफआईआर (FIR) अलग-अलग थानों में दर्ज कर चुकी है और वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। माना जा रहा है कि आंदोलन खत्म होने के बाद हिंसक गतिविधियों में शामिल प्रदर्शनकारियों का पासपोर्ट रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

❓ योगेंद्र यादव ने उठाया सवाल: 'शांतिपूर्वक' शब्द से फिर इस शर्त का क्या मतलब?

वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद आंदोलन से जुड़े योगेंद्र यादव ने सरकार के बयान में जोड़े गए 'शांतिपूर्वक' शब्द पर कड़ा ऐतराज जताया है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "सरकार खुद यह तय कर रही है कि कौन शांतिपूर्वक भाग ले रहे थे और कौन नहीं, तो फिर इस वादे का व्यावहारिक मतलब क्या रह जाता है? शांतिपूर्ण विरोध में तो किसी के खिलाफ वैसे भी केस नहीं होना चाहिए। मुख्य सवाल उन 11 एफआईआर का है जो पुलिस पहले ही दर्ज कर चुकी है, उनकी वापसी को लेकर बयान में कोई जिक्र नहीं है।"








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