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सोनम वांगचुक का अनशन: 17वां दिन, क्या अनशन खत्म करने को राजी होंगे वांगचुक?

  सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन पर हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग ...

 


सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन पर हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मंच पर अन्न त्यागने वाले वांगचुक से विपक्षी दलों के कई नेताओं ने अनशन खत्म करने की अपील की है। हालांकि, सीजेपी का कहना है कि वांगचुक अनशन इस तरह खत्म करने को राजी नहीं है और ऐसा करना 'अपमानजनक निकास' होगा। सीजेपी के प्रवक्ता विजेता दहिया ने कहा कि अनशन खत्म नहीं करा पाने की एक वजह भीड़ का नहीं आना भी है।

सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने मंगलवार को सोनम वांगचुक की बिगड़ती हालत की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने अनशन खत्म करने की अपील की, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं है। दीपके ने कहा, 'सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 17वां दिन है। उनके शरीर की मांसपेशियां कम होने लगी हैं और बहुत ज्यादा दर्द में हैं। दूसरों की तरह मैंने भी उनसे अनशन खत्म करने की अपील की। उन्होंने शांति से जवाब दिया- मुझे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए। सरकार से पूछिए कि वह कम से कम बात भी क्यों नहीं कर रहे हैं।'

अगर जंतर-मंतर पर 20 हजार लोग होते…

दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर सीजेपी प्रवक्ता दहिया का एक बयान भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह भीड़ नहीं आने की वजह से अनशन खत्म नहीं करा पाने की बात कह रहे हैं। दीपके के साथ खड़े दहिया कहते हैं, ‘किस मुंह से मैं उन्हें कह दूं कि सर छोड़ दो सब। हां अगर ऐसा होता कि यहां पर 20 हजार लोग जंतर-मंतर पर भरे होते, देशभर से आवाज उठ रही थी तो मैं शायद उनसे कहता कि सर चिंता मत करो, हम हार नहीं मान रहे, हम कोई दूसरा तरीका देखेंगे। लेकिन मुझे यह तो कहीं से सुनाई नहीं दे रहा है। लोग कह रहे हैं बंद कर दो, बंद कर दो। उस इंसान को मैं अपमानजनक निकास के लिए कैसे कहूं। कोई तो आप हमें रास्ता सुझाइए ना। देशभर से आवाज उठाइए ना।’

दहिया ने लोगों से जंतर मंतर आने और सोशल मीडिया पर आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा कि सपोर्ट दिखाकर ही वह अनशन खत्म करने की अपील कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'अभी जो अभिजीत ने नंबर दिया उस पर मिस्ड कॉल करके हमें बताइए कि 20 जुलाई को कितने लोग आ रहे हैं। 20 जुलाई से पहले भी जंतर मंतर पर आइए। सोशल मीडिया पर आई सपोर्ट सोनम वांगचुक लगा सकते हैं ताकि सरकार को दिखे कि कितने लोग सपोर्ट में हैं और जरूर इस बात के लिए आवाज उठाइए। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते रहिए। तभी यह होगा कि सर लोग हमारे सपोर्ट में है, तभी मैं उनसे यह बात कह सकता हूं, उससे पहले कैसे कहूं?'

असफलता का इतिहास बन जाएगा: वांगचुक

अनशन खत्म कर दिए जाने की अपील को लेकर एक यूट्यूब चैनल से बातचीत करते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्हें कहने की बजाय लोग सरकार तक अपनी बात पहुंचाएं। वांगचुक को इस बात का भी डर है कि यदि उन्होंने अनशन को इस तरह बीच में छोड़ दिया तो आगे कोई संघर्ष सफल नहीं होगा और असफलता का इतिहास बन जाएगा। उन्होंने कहा, 'अनशन रुकवाने का बेहतरीन तरीका मुझे कहना नहीं है। तरीका है कि सरकार से कहें। एक पीटीशन जारी किया गया है उसे साइन करें ताकि सरकार तक बात पहुंचे। दूसरा 20 जुलाई के मार्च में बड़ी संख्या में जुड़ें ताकि बात सरकार तक पहुंचे। मैं छोड़ दूंगा तो क्या फायदा होगा। आगे कोई भी संघर्ष सफल नहीं होगा। यह इतिहास बनकर रह जाएगी असफलता की।'








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