दिल्ली में मेट्रो फेज-4 के तहत अब इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ तक मेट्रो कॉरिडोर घनी आबादी के बीच से होकर गुजरेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता गुरुव...
दिल्ली में मेट्रो फेज-4 के तहत अब इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ तक मेट्रो कॉरिडोर घनी आबादी के बीच से होकर गुजरेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता गुरुवार को सराय रोहिल्ला मेट्रो स्टेशन परिसर में इस कॉरिडोर का शिलान्यास करेंगी। इस कॉरिडोर से मध्य दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और पुरानी दिल्ली के क्षेत्रों के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी मजबूत होगी। उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के बन जाने रोजाना सफर करने वाले करीब डेढ़ लाख यात्रियों को सहूलियत होगी।
डीएमआरसी के मुताबिक यह कॉरिडोर मजेंटा लाइन का विस्तार होगा। 12.30 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर पर 10 स्टेशन होंगे। इसका लगभग 11.35 किलोमीटर लंबा हिस्सा भूमिगत और करीब एक किलोमीटर लंबा हिस्सा एलिवेटेड होगा। घनी आबादी के बीच से भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण में ट्रेनों के लिए सुरंग तैयार करना चुनौतीपूर्ण होगा।
दिल्ली सचिवालय को मिलेगी कनेक्टिविटी
इस कॉरिडोर से दिल्ली सचिवालय को भी मेट्रो से सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। अभी मेट्रो से दिल्ली सचिवालय जाने के लिए आईटीओ स्टेशन पर उतरना पड़ता और यहां से ऑटो या कैब से पहुंचते हैं। कॉरिडोर पूरा होने से यात्रियों को सहूलियत होगी।
इंद्रलोक और नई दिल्ली पर बनेगा ट्रिपल इंटरचेंज
यह कॉरिडोर कई जगह अन्य लाइन की मेट्रो से जुड़ेगा। इस कॉरिडोर पर मेट्रो का संचालन हो जाने से इंद्रलोक और नई दिल्ली स्टेशन पर दो नए ट्रिपल इंटरचेंज बन जाएंगे। नई दिल्ली स्टेशन पर एयरपोर्ट लाइन और येलो लाइन का इंटरचेंज है, लेकिन मजेंट लाइन के इस कॉरिडोर के बाद यह भी ट्रिपल इंटरचेंज बन जाएगा। इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
गाजियाबाद से जेवर नमो भारत रूट की तैयारी शुरू
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए यात्रियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प उपलब्ध कराने के लिए एनसीआरटीसी ने गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर (नमो भारत) रूट की डीपीआर बनाने का काम तेज कर दिया है। यूपी सरकार से मंजूरी लेकर काम शुरू किया जाएगा। गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक प्रस्तावित 72.44 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर गाजियाबाद से शुरू होगा और नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी सिटी से होते हुए गुजरेगा।
12 स्टेशन और दो डिपो होंगे
एनसीआरटीसी के मुताबिक इस कॉरिडोर में 12 स्टेशन और दो डिपो होंगे। इस प्रोजेक्ट का मकसद प्रमुख रिहायशी, व्यावसायिक हब को जोड़कर पूरे एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। एनसीआरटीसी के मुताबिक इस कॉरिडोर को अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन रफ्तार के डिजाइन किया जाएगा।

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