दिल्ली के करोलबाग इलाके में भूमिगत मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान हरे-भरे पेड़ों और पर्यावरण को पहुँच रहे नुकसान पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद क...
दिल्ली के करोलबाग इलाके में भूमिगत मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान हरे-भरे पेड़ों और पर्यावरण को पहुँच रहे नुकसान पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अर्पित भार्गव की शिकायत पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने कड़ी मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारी इस तरह आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकते हैं और विकास कार्यों के दौरान पर्यावरण का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
⚖️ याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप: लोहे की कटाई से उड़ रही धूल और पत्तियां हो रही प्रभावित
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि करोलबाग में देशबंधु गुप्ता रोड के पास DDA की खाली जमीन पर DMRC द्वारा भूमिगत मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में मौजूद पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ों व हरित क्षेत्र को भारी नुकसान पहुँचाया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्माण स्थल पर स्टील व लोहे की छड़ें काटने से निकलने वाले धुएँ और धूल के कणों से पुराने पीपल के पेड़ों की पत्तियाँ और आसपास का पर्यावरण दूषित हो रहा है, जो दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
🗓️ 6 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई: अधिकारियों से मांगा गया जवाब
जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि निर्माण कार्य के दौरान पेड़ों को और अधिक क्षति पहुँचने से रोका जाए तथा नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

कोई टिप्पणी नहीं