दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के लंबे समय से लंबित पड़े आवेदनों पर दो मह...
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के लंबे समय से लंबित पड़े आवेदनों पर दो महीने के भीतर जरूरी कार्रवाई करने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि डीडीए 1,373 आवेदकों से पहले ही 155.06 करोड़ रुपये वसूल चुका है, इसके बावजूद मामलों पर फैसला अटकाकर बैठा हुआ है, जिससे दिल्ली के आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन सभी पुराने आवेदनों को मौजूदा नीति के तहत ही निपटाया जाए और भविष्य के मामलों के लिए एक नई नीति तैयार की जाए।
💰 155 करोड़ रुपये वसूलने के बावजूद लटकाया फैसला: 308 आवेदनों को मंजूरी मिलने के बाद भी कन्वेयंस डीड नहीं हुई निष्पादित
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि यह स्थिति उन संपत्ति मालिकों के लिए बेहद गंभीर और पीड़ादायक है, जिन्होंने तय समय पर आवेदन करने के साथ-साथ उस वक्त लागू सभी शुल्कों का भुगतान भी कर दिया है, लेकिन वे अब भी डीडीए के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अदालत के समक्ष यह भी बात सामने आई कि इनमें से 308 आवेदनों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी, फिर भी उनके स्वामित्व हस्तांतरण दस्तावेज (कन्वेयंस डीड) तैयार नहीं किए गए हैं।
📅 11 दिसंबर को अगली सुनवाई: आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव और डीडीए के उपाध्यक्ष को कार्यवाही में रहने का निर्देश
यह पूरा मामला डीडीए द्वारा संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के आवेदनों पर समय पर निर्णय न लेने के कारण उत्पन्न भारी समस्याओं से जुड़ा है, जिस पर कोर्ट सुनवाई कर रहा था। अदालत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि संबंधित प्राधिकारियों को बार-बार नागरिकों की समस्याओं से अवगत कराया जा चुका है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 11 दिसंबर को तय की गई है, जिसमें आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के सचिव और डीडीए के उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दिया गया है।

कोई टिप्पणी नहीं