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Jewar Caste Certificate Controversy: प्रशासन के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन, अर्थी सजाकर बैठे पीड़ित परिवार ने सीएम योगी से लगाई न्याय की गुहार

गौतमबुद्धनगर जिले के जेवर क्षेत्र में जाति प्रमाण पत्र को लेकर एक हैरान करने वाला और गंभीर विवाद सामने आया है। यहां के कानीगढ़ी गांव में एक ...

गौतमबुद्धनगर जिले के जेवर क्षेत्र में जाति प्रमाण पत्र को लेकर एक हैरान करने वाला और गंभीर विवाद सामने आया है। यहां के कानीगढ़ी गांव में एक पिता और उसके चार बेटे अपनी अर्थियां (चिताएं) सजाकर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि वे पिछले कई सालों से जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। अनशन पर बैठे इस परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवान स्वरूप बताते हुए अपनी न्याय की गुहार लगाई है, जबकि जिला मजिस्ट्रेट (DM) मेधा रूपम की कार्यप्रणाली पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।

🔥 चिता के सामने आमरण अनशन, बोले- 'या तो न्याय दो या जिंदा जलवा दो'

मामला जेवर के कानीगढ़ी गांव का है, जहां के निवासी सुंदर सिंह का कहना है कि प्रशासन उनके और उनके बच्चों के जाति प्रमाण पत्र जानबूझकर नहीं बना रहा है। इसी हताशा के चलते उन्होंने एक खाली प्लॉट में उपले और लकड़ी की पांच चिताएं तैयार की हैं और उनके सामने बच्चों संग आमरण अनशन शुरू कर दिया है। सुंदर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए एक पोस्टर भी लगाया है, जिसमें लिखा है कि या तो उन्हें उनका हक और न्याय दिया जाए या फिर उन्हें जिंदा जलवा दिया जाए। उनके इस अनशन का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।

📜 'गौतमबुद्धनगर में नहीं रहती अगरिया जाति' - डीएम के आदेश पर अटका मामला

सुंदर सिंह बताते हैं कि वे 'अगरिया' जाति से ताल्लुक रखते हैं और मजदूरी कर अपने चार बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनके बच्चों की स्कूल की पढ़ाई और भविष्य के लिए जाति प्रमाण पत्र बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि तहसील स्तर से प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइल जिला स्तर पर पहुंची थी, लेकिन डीएम ने यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया कि गौतमबुद्धनगर जिले में अगरिया जाति के लोग निवास नहीं करते हैं। इसके विपरीत, सुंदर का दावा है कि गांव में उनकी जाति के पट्टे मौजूद हैं और लोग सरकारी सेवाओं में भी कार्यरत हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद परिवार का अनशन जारी है और इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।






 

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