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दिल्ली विश्वविद्यालय में DUCKU का अनिश्चितकालीन धरना जारी

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। दिल्ली विश्वविद्यालय एवं कॉलेज कर्मचारी यूनियन (DUCKU) का विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर 6 अक्टूबर 2026 से 24 घ...

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। दिल्ली विश्वविद्यालय एवं कॉलेज कर्मचारी यूनियन (DUCKU) का विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर 6 अक्टूबर 2026 से 24 घंटे का अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है। यूनियन के अनुसार, विश्वविद्यालय और विभिन्न कॉलेजों में कार्यरत कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। धरने के केंद्र में दौलत राम कॉलेज की प्राचार्या के कार्यकाल, प्रशासनिक निर्णयों, नियुक्तियों और कर्मचारियों से जुड़े कथित मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग है।

यूनियन का आरोप है कि दौलत राम कॉलेज में प्रशासनिक अनियमितताओं, नियुक्तियों में कथित नियम उल्लंघन और कर्मचारी उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। DUCKU ने विश्वविद्यालय प्रशासन, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और संबंधित अधिकारियों से इन मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।


प्राचार्या के सेवा विस्तार की जांच की मांग

DUCKU का आरोप है कि दौलत राम कॉलेज की प्राचार्या को तीसरी बार सेवा विस्तार दिया गया है, जिसकी वैधानिकता और संबंधित नियमों के अनुरूप होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यूनियन ने सेवा विस्तार से जुड़े आदेशों की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होने पर उचित कार्रवाई की मांग की है।

निलंबित कर्मचारी पदाधिकारियों का मामला

यूनियन के अनुसार, दौलत राम कॉलेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान और सचिव पिछले आठ महीनों से निलंबित हैं। DUCKU का आरोप है कि प्राचार्या के विरुद्ध आवाज उठाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। यूनियन ने प्रो. पूनम वर्मा की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए समिति की समीक्षा और स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही, निलंबित पदाधिकारियों के मामलों में नियमानुसार शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।

दस महीने तक वेतन रोके जाने की जांच

DUCKU ने कॉलेज में लगभग 25 वर्षों से कार्यरत एक नियमित लाइब्रेरी कर्मचारी का वेतन करीब दस महीने तक रोके जाने का मामला भी उठाया है। यूनियन का कहना है कि उसके संघर्ष के बाद कर्मचारी का वेतन जारी किया गया। संगठन ने वेतन रोके जाने के कारणों की जांच, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासनिक और कर्मचारी नियुक्तियों पर सवाल

यूनियन ने कॉलेज में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियों के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद और UGC के लागू नियमों के कथित उल्लंघन की जांच कराने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, पिछले पांच वर्षों में हुई शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों की प्रक्रिया की समीक्षा करने पर जोर दिया गया है।

DUCKU ने विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियों में पात्रता प्रमाणपत्रों, आरक्षण रोस्टर और संबंधित दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन कराने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि किसी भी अनियमितता की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

कर्मचारी की व्यक्तिगत जानकारी के कथित दुरुपयोग का मामला

DUCKU ने 30 अप्रैल 2026 को दाखिल एक ऑनलाइन आरटीआई आवेदन में कॉलेज के एक अन्य कर्मचारी के नाम, पते और मोबाइल नंबर के कथित इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया है। यूनियन के अनुसार, इस मामले में मॉरिस नगर साइबर पुलिस थाने में शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच कर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की है।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच की मांग

दिल्ली विश्वविद्यालय एवं कॉलेज कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों, सेवा सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। यूनियन ने मांग की है कि दौलत राम कॉलेज से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को सौंपी जाए।

DUCKU ने स्पष्ट किया है कि प्राचार्या के सेवा विस्तार, कथित प्रशासनिक एवं नियुक्ति संबंधी अनियमितताओं और कर्मचारियों की लंबित शिकायतों पर ठोस कार्रवाई होने तक उसका शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।

नोट: इस समाचार में उल्लिखित अनियमितताओं, नियम उल्लंघन और कर्मचारी उत्पीड़न संबंधी आरोप DUCKU की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।






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