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Delhi High Court News: सजा में छूट रद्द करने के मामले में HC सख्त, दिल्ली सरकार के गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के गृह विभाग के सचिव को एक अवमानना ​​याचिका के मामले में व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होन...

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के गृह विभाग के सचिव को एक अवमानना ​​याचिका के मामले में व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का कड़ा निर्देश दिया है। यह पूरा मामला मई 2025 में अदालत द्वारा पारित एक आदेश का पालन न किए जाने से जुड़ा है, जिसमें आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी की रेमिशन (सजा में छूट) रद्द किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए गए थे। हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तारी के बाद कैदी की छूट रद्द कर दी गई थी, जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

🏛️ जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने दिए निर्देश: चार सप्ताह में अनुपालन हलफनामा न दाखिल करने पर जताई नाराजगी

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह सख्त निर्देश जारी किया। अदालत ने गौर किया कि पीठ के पिछले आदेश का पालन न करने का आरोप लगाते हुए अवमानना ​​याचिका दायर की गई है, जिसमें अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2023 में दायर आपराधिक याचिका पर 20 मई 2025 को दिए गए निर्देशों का अब तक कोई पालन नहीं हुआ है और न ही प्रतिवादियों की तरफ से कोई अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल किया गया है।

🔒 "स्वातंत्र्य और प्राकृतिक न्याय का हो सख्ती से पालन": कोर्ट ने कहा— बिना उचित प्रक्रिया के किसी की स्वतंत्रता सीमित नहीं की जा सकती

अपने मूल आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता को उचित प्रक्रियात्मक सुरक्षा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना केवल प्रशासनिक आदेश के जरिए सीमित नहीं किया जा सकता। कैदी सोनकर का तर्क था कि उसकी सजा में मिली छूट रद्द करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया था। अदालत की अवहेलना और समय-सीमा बीत जाने के बाद भी जवाब न मिलने पर अब गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया है।






 

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