सुप्रीम कोर्ट ने साल 2011 की एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल और पूरी तरह अंधी हो चुकी महिला को मिलने वाले मुआवजे की रकम में भारी बढ़ो...
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2011 की एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल और पूरी तरह अंधी हो चुकी महिला को मिलने वाले मुआवजे की रकम में भारी बढ़ोतरी की है। कोर्ट ने मुआवजा राशि को 2.94 करोड़ से बढ़ाकर 3.77 करोड़ रुपये कर दिया है। जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी पीड़ित का नौकरी पर बने रहना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसकी कमाई करने की क्षमता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।
👩💼 2. गुरुग्राम की कंपनी में डिप्टी मैनेजर थीं पीड़िता, हादसे के बाद 19 महीने रहना पड़ा था बिना वेतन की छुट्टी पर
दुर्घटना के समय 35 वर्षीय महिला गुरुग्राम स्थित आईबीएम दक्ष (IBM Daksh) में डिप्टी ग्रुप मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। हादसे में उन्हें पेल्विक में गंभीर चोटें आईं और स्थायी कोलोस्टॉमी करानी पड़ी। दुर्घटना के बाद वह लंबे समय तक (19 महीने) बिना वेतन के अवकाश पर रहीं। हालांकि बाद में उन्होंने विशेष सॉफ्टवेयर, लचीले कार्य घंटों और कंपनी की कॉर्पोरेट सहानुभूति के सहारे काम करना दोबारा शुरू किया, जिससे उनकी सीटीसी (CTC) में तकनीकी बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन वह भविष्य में जनरल मैनेजर और वाइस-प्रेसिडेंट जैसे ऊंचे पदों तक पहुंचने के मौकों से पूरी तरह चूक गईं।
💰 3. अदालत ने 100 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता मानते हुए भविष्य की कमाई और मेडिकल खर्च का नए सिरे से किया आकलन
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की उस रिपोर्ट को आधार बनाया जिसमें पीड़िता को पूरे शरीर में 100 प्रतिशत स्थायी शारीरिक अक्षमता घोषित किया गया था, जबकि हाई कोर्ट ने इसे 80 प्रतिशत माना था। कोर्ट ने कहा कि काम करने की क्षमता का आकलन खुले बाजार की प्रतिस्पर्धा के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी विशेष सुविधा वाले कार्यस्थल के आधार पर। अदालत ने भविष्य की कमाई के नुकसान, अटेंडेंट के खर्च, और दर्द-तकलीफ के मदों का नए सिरे से हिसाब लगाते हुए कुल मुआवजा 3,77,84,297 रुपये तय किया है, जिस पर याचिका दायर करने की तिथि से 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा।

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