नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर से दो बड़ी और अलग तस्वीरें सामने आई हैं, जहां एक तरफ घर खरीदारों ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपन...
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर से दो बड़ी और अलग तस्वीरें सामने आई हैं, जहां एक तरफ घर खरीदारों ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपनी एकजुटता से हारी हुई बाजी जीत ली है, तो दूसरी तरफ सरकारी एजेंसी अपनी योजना को भुनाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। नोएडा के सेक्टर-100 और 110 स्थित लोटस बुलेवर्ड व लोटस पनाश के बायर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने एक शानदार मिसाल पेश की है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने NCLAT के फैसले को पलटते हुए स्पष्ट किया है कि पुराने बिल्डर के दंड शुल्क का बोझ नए खरीदारों पर नहीं डाला जा सकता, जिससे सील किए गए टावरों को खोलने का रास्ता साफ हो गया है।
💰 2. खुद की गाढ़ी कमाई से 250 करोड़ रुपये जुटाकर बायर्स ने बनाए 2700 फ्लैट, अथॉरिटी के 350 करोड़ के जुर्माने के खिलाफ पहुंचे थे कोर्ट
लोटस पनाश शहर की इकलौता ऐसा प्रोजेक्ट है जहां बिल्डर के दिवालिया होने के बाद होम बायर्स ने हिम्मत नहीं हारी। 10 जनवरी 2019 को बिल्डर के भागने के बाद बायर्स ने 'पूल एंड बिल्ड' स्कीम के तहत खुद प्रोजेक्ट को पूरा करने का बीड़ा उठाया। साल 2019 से 2024 के बीच इन लोगों ने 250 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर 2700 फ्लैट बनाकर सफलतापूर्वक डिलीवर कर दिए। केवल तीन टावरों के 350 फ्लैटों का काम बाकी था, जिसपर नोएडा अथॉरिटी ने 350 करोड़ का टाइम एक्सटेंशन चार्ज थोपते हुए टावर सील कर दिए थे, जिसके खिलाफ बायर्स को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी।
🏢 3. ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की फ्लैट योजना रही फ्लॉप, अब 'पहले आओ-पहले पाओ' की तर्ज पर किया जाएगा खाली फ्लैटों का आवंटन
एक तरफ जहां होम बायर्स अपनी मेहनत से अपने आशियाने बचाने में कामयाब रहे, वहीं दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी सेक्टर-ओमिक्रॉन-1ए में निकाली गई अपनी 90 फ्लैटों की योजना को बेचने में बुरी तरह नाकाम रही। इन फ्लैटों का बेस प्राइस 73 से 74 लाख रुपये के बीच रखा गया था, लेकिन नीलामी में कोई खास दिलचस्पी न दिखाने के कारण बार-बार तारीख बढ़ाने के बाद भी अथॉरिटी को सिर्फ 5 आवेदन ही मिले। नीलामी प्रक्रिया के फ्लॉप होने के बाद अब अथॉरिटी ने अपनी रणनीति बदलते हुए बचे हुए सैकड़ों खाली फ्लैटों को 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर आवंटित करने का निर्णय लिया है।

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