पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को और अधिक शक्तियां और...
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को और अधिक शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि निगरानी और नियंत्रण की कमी के कारण ‘कभी-कभी पिंजरे में बंद तोता भी पिटबुल बन जाता है’। चिदंबरम शुक्रवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद की पुस्तक ‘पुलिसिंग द रिपब्लिक’ के विमोचन के अवसर पर आयोजित एक परिचर्चा में बोल रहे थे, जो पुलिस सुधारों और वर्दीधारी कर्मियों के कामकाज पर केंद्रित थी।
🦜 2. 'सीबीआई में बेहतरीन अफसर आते हैं, लेकिन केंद्र में आते ही क्यों बदल जाते हैं?', निगरानी और नियंत्रण की कमी पर उठाए सवाल
पुलिस की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के रवैये पर बात करते हुए चिदंबरम ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में एसएचओ से लेकर डीजीपी तक एक पदानुक्रम होता है। सीबीआई में राज्यों से डेपुटेशन पर बेहतरीन अफसर आते हैं, लेकिन केंद्र में आने के बाद उनमें बदलाव क्यों आ जाता है? उन्होंने इसके पीछे स्पष्ट रूप से निगरानी और नियंत्रण की कमी को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, उन्होंने पुलिस विभाग के भीतर आंतरिक सुधारों पर सहमति जताई, लेकिन एजेंसियों की बेकाबू होती ताकतों पर चिंता व्यक्त की।
🚫 3. लेखक यशोवर्धन आजाद की राय से असहमति जताते हुए बोले— अगर एजेंसियों को और ताकत मिली तो देश में मच जाएगी भारी उथल-पुथल
बुक लॉन्च के दौरान लेखक यशोवर्धन आजाद की इस राय का चिदंबरम ने विरोध किया जिसमें ईडी और सीबीआई को अधिक शक्तियां देने की बात कही गई थी। चिदंबरम ने दो टूक कहा कि वह इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हैं और अगर इन एजेंसियों को और अधिक अधिकार दिए गए, तो देश में भारी उथल-पुथल मच जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई और ईडी ने अपने वैध अधिकार-क्षेत्र का बहुत ज्यादा उल्लंघन किया है और कई मामलों में वे खुद ही कानून की तरह व्यवहार करने लगे हैं।

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