नोएडा में करीब 2500 फ्लैटों के मालिकाना हक का रास्ता साफ होने की बड़ी उम्मीद जगी है। नोएडा प्राधिकरण ने पुराने सेक्टरों की को-ऑपरेटिव हाउसिं...
नोएडा में करीब 2500 फ्लैटों के मालिकाना हक का रास्ता साफ होने की बड़ी उम्मीद जगी है। नोएडा प्राधिकरण ने पुराने सेक्टरों की को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों में फ्लैटों के मालिकाना हक से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने की दिशा में पहल की है। इस समाधान के लागू होने के बाद संबंधित सेक्टरों के फ्लैट मालिक अपनी व्यक्तिगत रजिस्ट्री आसानी से करा सकेंगे। यह समस्या मुख्य रूप से सेक्टर-21, 25, 28, 29, 30 और 37 समेत कई अन्य पुराने सेक्टरों की सोसाइटियों में बनी हुई थी।
📜 2. 1980-90 के दशक में हुई थी मास्टर लीज, त्रिपक्षीय सब लीज डीड न होने से अटकी थी रजिस्ट्री
इन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों को 1980 से 1990 के दशक के दौरान मास्टर लीज के आधार पर जमीन आवंटित की गई थी। आवंटन अधिक होने के कारण प्राधिकरण ने पूरी सोसाइटी की जमीन की मास्टर लीज संबंधित सोसाइटी के नाम कर दी थी। सोसाइटियों ने फ्लैट बनाकर सदस्यों को कब्जा तो सौंप दिया, लेकिन प्राधिकरण, सोसाइटी और व्यक्तिगत फ्लैट खरीदार के बीच त्रिपक्षीय सब लीज डीड (Tripartite Sub-Lease Deed) न होने के कारण सरकारी रिकॉर्ड में व्यक्तिगत मालिकाना हक दर्ज नहीं हो सका था।
📝 3. पावर ऑफ अटॉर्नी और फर्जी सदस्यता के विवादों पर लगेगा विराम, आगामी बोर्ड बैठक में बदले जाएंगे बायलाज
मालिकाना हक स्पष्ट न होने के कारण कई मूल आवंटियों ने बिना अनुमति पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए फ्लैट बेच दिए थे, जिससे फर्जी और अवैध सदस्यता के मामले भी सामने आए और प्राधिकरण ने ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी। अब इस समस्या के समाधान के लिए प्राधिकरण आगामी बोर्ड बैठक में बायलाज में बदलाव का प्रस्ताव रखने जा रहा है। बोर्ड से मंजूरी मिलते ही हजारों फ्लैट धारकों के लिए मालिकाना हक पाने और व्यक्तिगत रजिस्ट्री कराने का रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा।

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